राजस्थान में साल 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. जहां एक ओर पेपर लीक और नकल के आरोपों के चलते इस पूरी भर्ती को रद्द करने की मांग तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर ट्रेनिंग पूरी कर फील्ड में तैनात हो चुके करीब 700 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. इस पूरे मामले पर IPS राहुल ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक बेहद भावुक और तर्कपूर्ण अपील साझा की है, जिसमें उन्होंने निर्दोष अभ्यर्थियों के दर्द को बयां किया है.
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दोषियों की सजा निर्दोषों को क्यों?
आईपीएस राहुल ने न्यायशास्त्र के उस बुनियादी उसूल का हवाला दिया जो कहता है कि सौ अपराधी भले ही बच निकलें, लेकिन एक भी बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए. उन्होंने वीडियो में सवाल उठाया कि अगर इस भर्ती में 200 या 400 लोगों ने धांधली की है, तो उनकी वजह से उन बाकी सैकड़ों युवाओं का क्या कसूर है जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके यह मुकाम हासिल किया है? राहुल का मानना है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में जो खामियां रहीं, वे व्यवस्था की कमियां थीं. ऐसे में उन अभ्यर्थियों का हक छीनना, जो ईमानदारी से चुनकर आए हैं, न्याय के पूरी तरह खिलाफ होगा.
राजधर्म की याद और बाहुबली का उदाहरण
इस संवेदनशील मुद्दे को समझाने के लिए IPS राहुल ने मशहूर फिल्म बाहुबली का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि राजमाता ने बाहुबली को इसलिए चुना था क्योंकि उसने युद्ध जीतने के साथ-साथ निर्दोष नागरिकों की रक्षा भी की थी. उन्होंने प्रशासन को राजधर्म की याद दिलाते हुए कहा कि असली न्याय वही है जिसमें दोषियों को तो कड़ी सजा मिले, लेकिन किसी भी परिस्थिति में निर्दोष की बलि न चढ़े. उनके अनुसार, जांच एजेंसियों के लिए दोषियों को पहचानना कठिन जरूर हो सकता है, लेकिन जटिलता के डर से सामूहिक सजा देना सही समाधान नहीं है.
3 साल की नौकरी और सामाजिक जिम्मेदारियां
वीडियो में उन पुलिसकर्मियों के मानवीय पक्ष पर जोर दिया गया है जो पिछले तीन साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. आईपीएस राहुल ने कहा कि 2021 से लेकर अब तक इन युवाओं के जीवन में काफी बदलाव आए हैं. कई अभ्यर्थियों की शादी हो चुकी है और अब वे बच्चों के पिता भी बन चुके हैं. ऐसे में यदि उनसे अचानक नौकरी छीनी जाती है, तो वे और उनका परिवार गहरे मानसिक और आर्थिक सदमे में चले जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जो छात्र 2021 में पूरी तैयारी के साथ परीक्षा में बैठे थे, आज कई सालों बाद वे उसी प्रदर्शन को दोहरा पाएंगे, इसकी संभावना कम ही है.
विन-विन सिचुएशन की जरूरत
आईपीएस राहुल ने केवल चयनित अभ्यर्थियों का ही पक्ष नहीं लिया, बल्कि उन योग्य उम्मीदवारों की भी बात की जो धांधली की वजह से चयन से बाहर रह गए थे. उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह उन वंचित युवाओं को भी एक उचित अवसर दे. उन्होंने सुझाव दिया कि भले ही यह काम कितना भी मुश्किल और पेचीदा क्यों न हो, सरकार और विभाग को एक ऐसा समाधान निकालना चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए 'विन-विन सिचुएशन' पैदा करें. दोषियों को पहचान कर बाहर किया जाए और सही अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखा जाए.
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