राजेंद्र राठौड़ को अपने पिता से क्यों छिपानी पड़ी थी छात्र संघ अध्यक्ष बनने की बात! बेहद दिलचस्प है वजह

राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने पॉडकास्ट में अपने अनसुने किस्से साझा किए. उन्होंने स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत को अपना राजनीतिक गुरु बताया और छात्र राजनीति के दिनों को याद किया. राठौड़ ने सचिन पायलट को अहंकारी बताया और चूरू को अपना पहला प्यार कहते हुए खुद को हमेशा 'दोस्तों का दोस्त' करार दिया.

rajendra rathore
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आंचल गुप्ता

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राजस्थान भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने 'राजस्थान तक' के एक खास पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी, राजनीति, जेल के दिनों और अपनी दोस्ती के कई दिलचस्प और अनसुने किस्से साझा किए हैं. छात्र राजनीति से शुरुआत कर राजस्थान विधानसभा में अपनी धाक जमाने वाले राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत को अपनी राजनीति का पहला स्कूल बताया और सचिन पायलट को लेकर भी बेबाक टिप्पणी की. खुद को 'दोस्तों का दोस्त' बताने वाले राजेंद्र राठौड़ के इस खास इंटरव्यू में उनके जीवन के कई अनदेखे पहलू सामने आए हैं.

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राजनीति की पहली पाठशाला और भैरों सिंह शेखावत का साथ

राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी पिता के साए में पले-बढ़े होने के कारण उनके परिवार में पढ़ाई-लिखाई का माहौल था. उन्होंने कभी राजनीति में आने का नहीं सोचा था, लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय के माहौल ने उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया. उन्होंने खुलासा किया कि अगर राजनीति की पहली पाठशाला में किसी वाइस चांसलर (मार्गदर्शक) ने उन्हें प्रवेश दिया, तो वह पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत थे. उन्हीं की उंगली पकड़कर उन्होंने राजनीति के ककहरे सीखे.

पिता से छिपाई थी छात्र संघ अध्यक्ष बनने की बात

विश्वविद्यालय के दिनों को याद करते हुए राठौड़ ने बताया कि उस दौर में आज की तरह महंगी गाड़ियां नहीं हुआ करती थीं. छात्र नेता साइकिल या मोटरसाइकिल पर चला करते थे. उन्होंने जब यूनिवर्सिटी का छात्र संघ चुनाव जीता और अध्यक्ष बने, तो इस बात को अपने पिता से छिपाकर रखा था क्योंकि उनके पिता काफी अनुशासनप्रिय थे.

सचिन पायलट पर बेबाक टिप्पणी

जब पॉडकास्ट के दौरान राजस्थान के दिग्गज कांग्रेसी नेता सचिन पायलट के बारे में पूछा गया, तो राठौड़ ने अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने कहा कि सचिन पायलट निश्चित रूप से एक उभरते हुए बड़े नेता हैं, लेकिन उनके अंदर थोड़ा अहंकार (ईगो) जरूर भरा रहता है.

चूरू जिला पहला और आखिरी प्यार

अपनी राजनीतिक जमीन के बारे में बात करते हुए राजेंद्र राठौड़ बेहद भावुक नजर आए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "आज भी चूरू, कल भी चूरू और परसों भी चूरू... यह चूरू जिला ही मेरा पहला प्यार और राजनीतिक सबक है." उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र की जनता और वहां से उनका जुड़ाव हमेशा उनके दिल के करीब रहेगा.

बिना किसी पद के कौन हैं राजेंद्र राठौड़?

इंटरव्यू के आखिरी पड़ाव में जब उनसे पूछा गया कि अगर विधायक, मंत्री, रणनीतिकार और तेजतर्रार वक्ता जैसे सारे बड़े राजनीतिक पदों को हटा दिया जाए, तो राजेंद्र राठौड़ कौन हैं? इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "राजेंद्र राठौड़ सिर्फ एक दोस्तों का दोस्त है, जो अपनी जिंदगी को अपने नियमों और शर्तों पर जीता है. मेरी कभी किसी के पीछे भागकर कुछ मांगने की तमन्ना नहीं रही. मैं अपने सिद्धांतों और पार्टी के प्रति निष्ठा के साथ जीने और मरने वाला व्यक्ति हूं."

पूरा पॉडकास्ट देखिए

 

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