राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की दिवंगत अधिकारी प्रियंका बिश्नोई की मौत के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है. अदालत के सख्त रुख के बाद जोधपुर के वसुंधरा अस्पताल और उसके डॉक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सबूतों से छेड़छाड़ की धाराओं के तहत चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में दोबारा मामला दर्ज किया गया है.
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33 साल की RAS अधिकारी प्रियंका बिश्नोई का निधन 18 सितंबर 2024 को हुआ था. 5 सितंबर 2024 को पेट दर्द की शिकायत के बाद उन्हें जोधपुर के वसुंधरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी एक सामान्य सर्जरी की गई. ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. हालत में सुधार न होने पर परिजनों ने उन्हें अहमदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ 13 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों की भारी लापरवाही और एनेस्थीसिया के गलत इस्तेमाल की वजह से उनकी जान गई.
अस्पताल की रिपोर्ट और समय पर उठे बड़े सवाल
प्रियंका बिश्नोई के परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल प्रशासन ने भारी लापरवाही बरती और बाद में सच छिपाने के लिए फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए गए.
प्रियंका के परिजनों ने अदालत के सामने अस्पताल के कागजातों की कुछ बड़ी खामियां रखीं है:
- प्रियंका बिश्नोई को पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
- उनके खून की जांच के लिए सैंपल दोपहर में लिया गया और लैब से उसकी रिपोर्ट करीब 1:30 बजे आई. लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड में डॉक्टर ने 11:30 बजे ही जांच पूरी होने की बात लिख दी.
- इतना ही नहीं, कागजों में ऑपरेशन दोपहर 1:05 बजे शुरू होना दिखाया गया है, जबकि खून की रिपोर्ट ही 1:30 बजे आई थी.
- परिवार का सीधा सवाल है कि जब जांच रिपोर्ट आई ही नहीं थी तो किस आधार पर ऑपरेशन शुरू कर दिया गया और डॉक्टरों ने गलत समय क्यों दर्ज किया?
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अदालत का आदेश और पुलिस की कार्रवाई
जोधपुर कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने वसुंधरा अस्पताल के संचालक डॉ. संजय मकवाना, डॉ. रेणू मकवाना, डॉ. विनोद शैली और डॉ. जितेंद्र खेतावत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि अदालत से मिले निर्देशों के आधार पर दस्तावेजों में हेरफेर और धोखाधड़ी के आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2024 में प्रियंका बिश्नोई को एक सामान्य सर्जरी के लिए जोधपुर के वसुंधरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ऑपरेशन के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया. वहां 13 दिनों तक चले इलाज के बाद 18 सितंबर 2024 को प्रियंका ने दम तोड़ दिया.
पहले पुलिस और मेडिकल कमेटी की जांच में अस्पताल को क्लीन चिट मिल गई थी, जिससे मामला बंद हो गया था. लेकिन अब परिवार की अर्जी पर कोर्ट ने पाया है कि रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ हुई हो सकती है, जिसके बाद डॉक्टरों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं.
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