Dholpur news: राजस्थान की राजनीति में युवाओं के दिलों की धड़कन बन चुके शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी का एक बेहद भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. धौलपुर के बाड़ी में महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब रविंद्र सिंह भाटी का सामना अपने गुरु से हुआ, तो मंच पर एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं.
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जेसीबी से हुई फूलों की बारिश, चांदी के मुकुट से स्वागत
महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर आयोजित केसरिया शोभा यात्रा में शामिल होने के बाद रविंद्र सिंह भाटी बाड़ी पहुंचे थे. उनके साथ बाड़ी के पूर्व विधायक गिरराज सिंह मलिंगा भी मौजूद रहे. बाड़ी पहुंचने पर राजपूत समाज के युवाओं ने भाटी का जोरदार स्वागत किया. इसके बाद वे जैसे ही कृष्णा रिसोर्ट में आयोजित भव्य स्वागत समारोह में पहुंचे, तो युवाओं का उत्साह देखने लायक था. वहां भाटी का स्वागत जेसीबी मशीनों से पुष्प वर्षा करके किया गया. पूरे माहौल में 'रविंद्र सिंह भाटी जिंदाबाद' के नारे गूंज रहे थे. उन्हें पारंपरिक राजस्थानी पगड़ी पहनाई गई और चांदी का मुकुट भेंट कर सम्मानित किया गया.
जब गुरु के चरणों में झुके भाटी
इस पूरे भव्य कार्यक्रम का सबसे भावुक और यादगार पल तब आया जब रविंद्र सिंह भाटी मंच पर मौजूद अपने गुरु जगदीश पहाड़िया के पास पहुंचे. अपनी इस बड़ी राजनीतिक सफलता और लोकप्रियता के बावजूद भाटी बिना किसी संकोच के तुरंत अपने गुरु के चरणों में झुक गए. अपने प्रिय शिष्य को इस तरह पैरों में झुका देख गुरु जगदीश पहाड़िया भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने तुरंत भाटी को उठाकर गले से लगा लिया. कुछ पलों के लिए मंच पर पूरी तरह से भावुकता छा गई.
गुरु ने जताया गर्व, भाटी बोले- 'संस्कारों के बिना सफलता अधूरी'
शिष्य की इस सफलता पर गर्व जताते हुए गुरु जगदीश पहाड़िया ने कहा कि एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा गर्व का विषय नहीं हो सकता कि उसका शिष्य समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाए और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने. उन्होंने रविंद्र भाटी के संघर्ष, संस्कार और समर्पण की जमकर तारीफ की.
वहीं, अपने गुरु की बातें सुनकर रविंद्र सिंह भाटी भी भावुक नजर आए. उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के बाद भी यदि कोई अपने गुरु और अपने संस्कारों को भूल जाए, तो उसकी सफलता अधूरी मानी जाती है. आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके गुरुजनों के संस्कारों, मार्गदर्शन और आशीर्वाद का सबसे बड़ा योगदान है. भाटी ने युवाओं को संदेश दिया कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता, इसलिए संघर्ष के दिनों में साथ खड़े रहने वाले लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए.
राजनीति में अक्सर शक्ति प्रदर्शन और खींचतान की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन धौलपुर के बाड़ी से आई गुरु-शिष्य के अटूट रिश्ते और संस्कारों की यह जीवंत तस्वीर इस समय इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत रही है.
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