राजस्थान की राजनीति में जुबानी जंग अब मर्यादा की सीमाएं लांघती नजर आ रही है. टोंक में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल द्वारा कांग्रेस नेता सचिन पायलट को लेकर दिए गए एक बयान ने सियासी गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है. पायलट के गढ़ में बीजेपी नेता के इस हमले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है.
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बीजेपी नेता का वो बयान जिसने सुलगाई आग
टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राधा मोहन दास अग्रवाल ने मंच से सचिन पायलट पर तीखा हमला बोला. उन्होंने पायलट को "उत्तर प्रदेश का भगोड़ा" और "बहरूपिया" तक कह डाला. उन्होंने सवाल उठाया कि पायलट राजस्थान के निवासी भी नहीं हैं, फिर भी यहाँ से विधायक बने बैठे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पायलट की एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी पता नहीं कहाँ.
कांग्रेस का पलटवार
पायलट पर की गई इस टिप्पणी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने टोंक के गांधी पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने राधा मोहन दास अग्रवाल की सांकेतिक शव यात्रा निकाली और उनका पुतला फूंका. कांग्रेस नेताओं ने इसे "ओछी और हल्की राजनीति" करार देते हुए बीजेपी नेता से तुरंत माफी मांगने की मांग की है.
अगर पायलट भगोड़े हैं, तो पीएम मोदी क्या हैं?
कांग्रेस ने बीजेपी के 'बाहरी बनाम स्थानीय' वाले दांव पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया. कांग्रेस नेताओं ने पूछा कि अगर राजस्थान से चुनाव लड़ने पर सचिन पायलट भगोड़े हैं, तो फिर पीएम मोदी क्या हैं जो गुजरात छोड़कर वाराणसी से चुनाव लड़ते हैं? साथ ही उन्होंने बीजेपी के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया को भी बाहरी बताते हुए बीजेपी को आईना दिखाया.
पायलट की लोकप्रियता और बीजेपी की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सचिन पायलट पर यह सीधा हमला बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. राजस्थान में पायलट कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं, ऐसे में उन्हें निशाना बनाकर बीजेपी सीधे तौर पर 'चेहरा बनाम चेहरा' की लड़ाई लड़ना चाहती है.
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