राजस्थान की चर्चित कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में अब एक बड़ा मोड़ आया है. करीब 20 दिनों की लंबी जांच, एफएसएल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के बाद जोधपुर पुलिस ने कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ धारा 106 (A) (लापरवाही से मौत) के तहत मामला दर्ज कर लिया है.
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इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी थी हालत
बता दें कि जोधपुर के बोरानाडा स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत खराब होने पर कंपाउंडर देवी सिंह को बुलाया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 'डेक्सोना' और 'डाइक्लोफेनिक' जैसे इंजेक्शन लगाए गए थे, जिसके कुछ ही देर बाद उनकी हालत और बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई. मेडिकल बोर्ड का कहना है कि अस्थमा के मरीजों के लिए ये इंजेक्शन जानलेवा साबित हो सकते हैं.
कंपाउंडर और नर्सिंग स्टाफ का पक्ष
वहीं, आरोपी कंपाउंडर देवी सिंह का कहना है कि उन्होंने कुछ भी अपनी मर्जी से नहीं किया. उन्होंने वही इंजेक्शन लगाए जो डॉक्टर की पुरानी पर्ची में लिखे हुए थे. राजस्थान के नर्सिंग स्टाफ ने भी देवी सिंह का समर्थन करते हुए इसे 'मानवता के नाते की गई मदद' बताया है. उनका तर्क है कि गांव और ढाणियों में अक्सर नर्सिंग अधिकारी ही प्राथमिक उपचार के लिए पहुंचते हैं और देवी सिंह ने भी परिजनों के आग्रह पर ही मदद की थी.
पुलिस जांच में क्या निकला?
जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश पासवान ने स्पष्ट किया है कि साध्वी की मौत 'कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट' की वजह से हुई है. जांच में जहर, बाहरी चोट या यौन शोषण जैसे किसी भी एंगल की पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस अब तक 44 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है और 100 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स खंगाली गई है.
फिलहाल, मामले की जांच एसआईटी प्रभारी एसीपी छवि शर्मा की देखरेख में चल रही है. क्या यह सिर्फ एक मेडिकल नेग्लिजेंस है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश, यह मेडिकल एक्सपर्ट्स की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा.
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