Podcast: राहुल-प्रियंका से कैसा है 'संजना जाटव' का कनेक्शन...भरतपुर सांसद ने सुनाया दिलचस्प किस्सा!

आंचल गुप्ता

02 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 2 2026 9:30 AM)

भरतपुर सांसद संजना जाटव ने पॉडकास्ट में अपने संघर्ष, परिवार, पति के सहयोग, पिता की याद, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से रिश्ते, चुनावी सफर और भरतपुर के विकास पर खुलकर बात की. उन्होंने महिलाओं की राजनीतिक चुनौतियों और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने का भी दावा किया.

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Sanjana Jatav Podcast: राजनीति की दुनिया में नेताओं के भाषण और बयान अक्सर सुर्खियां बनते हैं, लेकिन कभी-कभी उनकी निजी जिंदगी के ऐसे किस्से सामने आते हैं, जो लोगों को उनसे जोड़ देते हैं. राजस्थान की सबसे युवा सांसदों में शामिल भरतपुर से कांग्रेस सांसद संजना जाटव ने हमारे सहयोगी चैनल राजस्थान तक के पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी के ऐसे ही कई अनसुने किस्से शेयर किए है. बातचीत के दौरान कभी वह पिता को याद कर भावुक हुईं, तो कभी पति के संघर्ष और सहयोग का जिक्र किया. उन्होंने 409 वोट से चुनाव हारने का दर्द बताया, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से अपने रिश्ते पर खुलकर बात की और भरतपुर की राजनीति से जुड़े सवालों के भी बेबाक जवाब दिए.

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18 साल की उम्र में शादी, फिर राजनीति में रखा कदम

संजना जाटव ने बताया कि उनकी शादी सिर्फ 18 साल की उम्र में हो गई थी. उस समय उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था. शादी के बाद ससुराल वालों ने उन्हें जिला परिषद का चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि उनके पति और पूरे परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया. शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और एलएलबी तक की पढ़ाई पूरी की.

409 वोट से हार... फिर खूब रोई थीं

संजना जाटव ने अपने पहले विधानसभा चुनाव को याद करते हुए कहा कि कठूमर सीट से वह सिर्फ 409 वोटों से हार गई थीं. उस हार ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था.

उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद वह कमरे में जाकर घंटों रोती रहीं. उन्हें लगा कि जनता ने उनका साथ दिया था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उनके साथ अन्याय हुआ. हालांकि परिवार और कार्यकर्ताओं ने उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

पिता की मौत आज भी देती है सबसे बड़ा दर्द

पॉडकास्ट के दौरान संजना पिता को याद करते हुए भावुक हो गई और अपने आसूं रोक नहीं सकीं.  उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव हारने के कुछ समय बाद उनके पिता की तबीयत बिगड़ गई थी. अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने उनके सामने ही अंतिम सांस ली. संजना ने कहा कि आज भी जब वह मायके जाती हैं तो सबसे ज्यादा पिता की कमी महसूस होती है.

उन्होंने कहा,

"कभी-कभी अकेले बैठकर रो लेती हूं. जब घर जाती हूं तो लगता है कि पापा बाहर खड़े मिलेंगे, लेकिन अब वो एहसास नहीं मिलता."

पति नहीं होते तो शायद सांसद नहीं बन पाती

संजना जाटव ने कई बार अपने पति का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर पति का साथ नहीं मिलता तो शायद वह राजनीति में इतनी आगे नहीं बढ़ पातीं.

उन्होंने बताया कि आज भी जब उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों के कारण कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहना पड़ता है, तब उनके पति और ससुराल वाले बच्चों की पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों से दूर रहना उनके जीवन का सबसे मुश्किल हिस्सा है.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से रिश्ते पर क्या बोलीं?

संजना जाटव ने बताया कि लोकसभा पहुंचने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से उनका लगातार उनकी बातचीत होती है. उन्होंने रक्षाबंधन का एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया. संजना ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी के लिए राखी भेजी थी. उस समय राहुल गांधी मौजूद नहीं थे, इसलिए प्रियंका गांधी ने उनकी ओर से राहुल गांधी की कलाई पर राखी बांधी और बाद में उसकी तस्वीर भी उन्हें भेजी.

संजना ने कहा कि गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें बहुत सम्मान और अवसर दिए हैं.

'मैं जनता के बीच रहती हूं, सिर्फ दिल्ली में नहीं'

विपक्ष के इस आरोप पर कि वह भरतपुर में कम रहती हैं, संजना ने साफ कहा कि उनका ज्यादातर समय अपने संसदीय क्षेत्र में ही बीतता है.

उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे आरोप लगाते हैं, वे एक दिन उनके साथ सुबह से रात तक रहें. उन्हें खुद पता चल जाएगा कि उनका पूरा दिन जनता की समस्याएं सुनने और कार्यक्रमों में गुजरता है.

भरतपुर के लिए क्या हैं उनकी प्राथमिकताएं?

संजना जाटव ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताएं शिक्षा, पीने का पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं और क्षेत्र का विकास हैं.

उन्होंने दावा किया कि सांसद निधि का बड़ा हिस्सा उन्होंने शिक्षा और जनसुविधाओं पर खर्च किया है. पानी की समस्या को लेकर भी वह लगातार संसद और संबंधित मंत्रालयों में आवाज उठा रही हैं.

राजनीति में महिलाओं का संघर्ष सबसे बड़ा

संजना ने कहा कि राजनीति में महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार और सार्वजनिक जीवन के बीच संतुलन बनाना है.

उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को छोड़कर कई-कई दिन बाहर रहना आसान नहीं होता, लेकिन जनता की जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है.

गांव की जिंदगी आज भी सबसे ज्यादा पसंद

सांसद बनने के बाद भी संजना जाटव खुद को गांव से जुड़ा हुआ मानती हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें आज भी चूल्हे की रोटी, सिलबट्टे की चटनी, खेतों में जाना और परिवार के साथ समय बिताना सबसे ज्यादा पसंद है.

उन्होंने कहा कि मौका मिलने पर वह आज भी गांव जाकर घर के काम करती हैं और वही उन्हें सबसे ज्यादा सुकून देता है.

देखिए पूरा पॉडकास्ट