सोनिया गांधी की किताब पर भारत में क्यों मचा घमासान? गहलोत का दावा- PM मोदी, RSS और चीन वाले हिस्से हटाने का था दबाव

न्यूज तक डेस्क

• 10:44 AM • 29 Aug 2026

सोनिया गांधी की किताब 'Belonging: A Journey of Love' प्रकाशन से पहले विवादों में है. पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि तथ्य जांचना प्रकाशक की जिम्मेदारी है. अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि PM मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्से हटाने का दबाव था. कांग्रेस नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ा.

Sonia Gandhi book
Sonia Gandhi book
Google CTA

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आने वाली किताब 'Belonging: A Journey of Love' को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया की स्थिति साफ होने के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि किताब के कुछ हिस्सों में बदलाव करने का दबाव बनाया गया था.

Read more!

गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट X पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पेंग्विन का अंतरराष्ट्रीय इम्प्रिंट इस किताब को उसके मूल स्वरूप में दुनिया के दूसरे हिस्सों में प्रकाशित करने के लिए तैयार है, तो भारत में अलग रुख क्यों अपनाया गया.

गहलोत ने किस बात पर उठाया सवाल?

अशोक गहलोत का कहना है कि सोनिया गांधी की किताब को लेकर भारत और विदेश में प्रकाशन की स्थिति अलग नजर आ रही है. उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किताब को मूल रूप में प्रकाशित करने की तैयारी है, जबकि भारत में प्रकाशन से पहले कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई गई.

गहलोत ने आरोप लगाया कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कथित कब्जे से संबंधित हिस्सों में बदलाव करने की मांग की गई थी. हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं. पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है.

पेंग्विन ने दी अपनी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया कि वह भारत में 'Belonging: A Journey of Love' की प्रकाशक नहीं है. कंपनी ने कहा कि किसी किताब के प्रकाशन से पहले उसके तथ्यों की जांच करना प्रकाशक की जिम्मेदारी है.

प्रकाशक के मुताबिक, लेखक के साथ संपादकीय स्तर पर चर्चा करना प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है. कंपनी ने उन दावों से भी दूरी बनाई, जिनमें कहा गया था कि लेखक द्वारा संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं करने की वजह से उसने किताब को प्रकाशित करने से मना किया. पेंग्विन ने यह भी कहा कि लेखक के साथ हुई निजी बातचीत के बारे में वह आगे टिप्पणी नहीं करेगी.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

किताब को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब रिपोर्ट सामने आई कि पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने भारत में इसके प्रकाशन से कदम पीछे खींच लिए हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रकाशक और सोनिया गांधी के बीच किताब के कुछ हिस्सों में संपादकीय बदलाव को लेकर मतभेद थे. सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि कुछ हिस्सों में बदलाव और कटौती का सुझाव दिया गया था, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया.

इसके बाद भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर दूसरे प्रकाशकों की दिलचस्पी बढ़ गई. रिपोर्टों में HarperCollins का नाम भी सामने आया है.

10 नवंबर को रिलीज होगी किताब

सोनिया गांधी की यह किताब दुनिया भर में 10 नवंबर को रिलीज होने वाली है. इसकी घोषणा अमेरिका स्थित Alfred A. Knopf ने की थी. यह Penguin Random House का ही एक हिस्सा है. किताब को सोनिया गांधी के जीवन और उनके कई दशकों के राजनीतिक अनुभवों से जुड़ा संस्मरण बताया गया है. प्रकाशक की ओर से पहले संस्करण में करीब एक लाख प्रतियां छापने की योजना की जानकारी भी सामने आई है.

 कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा बनाया

पेंग्विन की सफाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ दिया है. गहलोत का तर्क है कि अगर किताब विदेश में अपने मूल स्वरूप में प्रकाशित हो सकती है, तो भारत में इसके कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति क्यों है. उन्होंने प्रकाशन प्रक्रिया में कथित दबाव को लेकर भी सवाल उठाया है.

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी लेखक की किताब में क्या लिखा जाए और क्या हटाया जाए, यह सवाल सिर्फ संपादकीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह जाता, खासकर तब जब मामला देश की राजनीति और संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा हो.

कमलनाथ ने भी उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मामले पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या कोई प्रकाशक यह तय कर सकता है कि किसी वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती को अपनी किताब में क्या लिखना चाहिए और क्या नहीं. कमलनाथ ने यह सवाल भी उठाया कि क्या प्रकाशक का रुख पूरी तरह उसका अपना है या उस पर किसी तरह का दबाव है.