'दबा दोगे तो कैसे दिखेगा पेपर लीक?' : RAS और NEET घोटाले पर भड़के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने नीट और आरएएस (RAS) परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर बीजेपी सरकार पर पेपर लीक के मामलों को दबाने का आरोप लगाया है. उन्होंने एसओजी की 'गेस पेपर' वाली थ्योरी पर तंज कसा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

NEET Paper Leak
NEET Paper Leak

न्यूज तक डेस्क

follow google news

राजस्थान में NEET (UG) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर सियासत का पारा चरम पर पहुंच गया है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी सरकार पर पेपर लीक के मामलों को दबाने और अपराधियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है. जूली ने साफ कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने में नाकाम रही है और अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है.

Read more!

RAS और NEET पेपर लीक का भी किया दावा

टीकाराम जूली ने सिर्फ नीट ही नहीं बल्कि राजस्थान की पूर्ववर्ती परीक्षाओं पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि जोधपुर और नवलगढ़ में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के पेपर खुलेआम सड़क पर मिले थे, लेकिन सरकार ने उस मामले को भी रफा-दफा कर दिया. उन्होंने अलवर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी बीजेपी नेता के कॉलेज में पेपर लीक हुआ था, जिसे सरकार ने केवल 'नकल' की एफआईआर दर्ज कर ठंडे बस्ते में डाल दिया.

'एसओजी के मुताबिक तो यह सिर्फ गेस पेपर था'

जूली ने राजस्थान एसओजी (SOG) की जांच पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि जब नीट का इतना बड़ा घोटाला सामने आया, तो एसओजी की तरफ से बयान आया कि यह असली पेपर नहीं बल्कि 'गेस पेपर' था. जूली ने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि आखिर ऐसा कौन सा भविष्यवक्ता (Astrologer) आ गया है, जिसके गेस किए हुए बायोलॉजी के पूरे 90 और केमिस्ट्री के पूरे 45 सवाल हूबहू परीक्षा में मैच कर गए?.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और 9 दिन की देरी पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उन्हें देश के लाखों छात्रों से माफी मांगनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर राजस्थान में मामले की एफआईआर दर्ज करने में 9 दिन की देरी की गई? उन्होंने आरोप लगाया कि अगर यह एफआईआर राजस्थान के कड़े कानून के तहत दर्ज होती, तो आरोपियों को आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा मिलती.

'मगरमच्छों को कब पकड़ेगी सरकार?'

जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए पूछा कि सदन में 'मगरमच्छों' को पकड़ने का दावा करने वाले सीएम अब चुप क्यों हैं? गिरफ्तार आरोपी खुद को 'छोटी मछली' बता रहे हैं, तो आखिर वे 'बड़े मगरमच्छ' कौन हैं जिनका नाम उजागर नहीं किया जा रहा है? उन्होंने तंज कसा कि सरकार इन गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए मंत्रियों के ईवी (EV), बस और ऑटो में चलने का सियासी नाटक कर रही है.


 

    follow google news