Tonk RAS Topper Success Story: सुमन गुर्जर ने MBC (अति पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में महिलाओं के वर्ग में पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान हासिल किया है. खास बात यह है कि यह सुमन की लगातार दूसरी बड़ी सफलता है. इससे पहले उनका चयन राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के लिए हुआ था और फिलहाल वह उसकी ट्रेनिंग कर रही थीं. लेकिन प्रशासनिक सेवा (RAS) में जाने के अपने जुनून के चलते उन्होंने फिर से परीक्षा दी और अब वह एसडीएम (SDM) के पद के लिए चुनी गई हैं.
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कर्नल बैंसला का 'चाय वाला सपना'
सुमन की इस सफलता के साथ ही कर्नल बैंसला का एक किस्सा फिर से चर्चा में है. बैंसला साहब अक्सर कहा करते थे कि उनका सपना है कि वह किसी ऐसी महिला जिला कलेक्टर के दफ्तर में जाएं जो उनके अपने समाज की बेटी हो और वहां बैठकर उसके साथ चाय पिएं. सुमन कहती हैं, "कर्नल साहब का वह सपना समाज के हर बच्चे को प्रेरित करता है. आज समाज की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर उनके इस विजन को साकार कर रही हैं."
सरकारी स्कूल से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
सुमन गुर्जर की सफलता उन छात्रों के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी का हवाला देते हैं. सुमन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हिंदी माध्यम से की और 11वीं-12वीं की शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने महारानी कॉलेज और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक किया. सुमन के पिता रामकिशन गुर्जर एक शारीरिक शिक्षक हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
सोशल मीडिया से दूरी और सफलता का मंत्र
सुमन की सफलता का सबसे बड़ा राज सोशल मीडिया से दूरी और पढ़ाई में निरंतरता रही है. उनके पिता ने बताया कि सुमन ने 12वीं तक कभी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया और वह फेसबुक-व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्म से पूरी तरह दूर रहीं. सुमन का मानना है कि प्रशासनिक सेवा में आने के लिए ग्रेजुएशन के तुरंत बाद तैयारी शुरू कर देनी चाहिए और अपनी पढ़ाई में कभी भी गैप नहीं आने देना चाहिए.
अगला लक्ष्य: यूपीएससी (UPSC)
आरपीएस और फिर अब आरएएस बनने के बाद सुमन के कदम यहीं रुकने वाले नहीं हैं. उनका अगला लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग की यूपीएससी परीक्षा को पास कर आईएएस (IAS) बनना है. सुमन की इस उपलब्धि पर उनके परिवार और निवाई क्षेत्र में जश्न का माहौल है.
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