CJP आंदोलन में बेरोजगार युवाओं का फूटा गुस्सा, बोले-'सिस्टम नहीं सुधरा तो भारत में होंगे नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात'

दिल्ली में चल रहे युवाओं के आंदोलन में बेरोजगारी और सिस्टम के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार और न्यायपालिका पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

CJP Jantar Mantar Protest
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न्यूज तक डेस्क

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देश में बेरोजगारी और न्याय व्यवस्था के मौजूदा हालातों को लेकर युवाओं का गुस्सा चरम पर है. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंचे युवाओं का आरोप है कि सरकार और पूरा सिस्टम मिलकर पढ़े-लिखे नौजवानों को अपमानित कर रहा है.

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नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात हो सकते हैं

हरियाणा के रेवाड़ी से इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे एक युवा ने सरकार और न्यायपालिका पर तीखे सवाल खड़े किए हैं और चेतावनी दी है कि अगर युवाओं की आवाज को दबाया गया, तो भारत में भी नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी और सरकार पर मिलीभगत के आरोप
आंदोलन में शामिल युवाओं ने हाल ही में आई 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पढ़े-लिखे और बेरोजगार युवाओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल एक सोची-समझी साजिश (प्री-प्लान्ड) का हिस्सा है. युवाओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पूरे सिस्टम को हाईजैक कर लिया है और न्यायपालिका में भी नियुक्तियां राजनीतिक इशारों पर हो रही हैं, जिससे आम जनता का भरोसा डगमगा रहा है.

दिल्ली में युवाओं को रोकने की कोशिश का दावा

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सरकार इस आंदोलन से इतनी घबराई हुई है कि जंतर-मंतर और दिल्ली के आसपास के मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगा दी गई हैं. गुरुग्राम और अन्य सीमावर्ती इलाकों से आने वाले लाखों युवाओं को पुलिस द्वारा जगह-जगह बिना किसी ठोस कारण के रोका और डिटेन किया जा रहा है. सुबह से ही युवाओं को दिल्ली में प्रवेश करने और प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

ईवीएम और चुनावी नतीजों पर उठाए सवाल

हरियाणा और अन्य राज्यों में भाजपा की चुनावी जीत पर बात करते हुए युवाओं ने आरोप लगाया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली और ईवीएम मैनिपुलेशन किया जा रहा है. विपक्षी एजेंटों को पोलिंग बूथों से हटाने और वोटों की गिनती में हेरफेर करने के गंभीर आरोप भी लगाए गए. युवाओं का कहना है कि जब तक यह 'गली-सड़ी व्यवस्था' नहीं बदलेगी, तब तक युवाओं का यह शांतिपूर्ण आंदोलन आखिरी मुहिम तक जारी रहेगा.

 

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