कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और अपनों का साथ हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर देश के सबसे ऊंचे पद तक पहुंचा जा सकता है. राजस्थान के जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र की बेटी अनीता देवड़ा ने इस बात को सच कर दिखाया है. यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा 2025 में 644वीं रैंक हासिल कर अनीता ने अपने आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया है.
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मां के संघर्ष ने लिखी सफलता की इबारत
अनीता की इस शानदार उपलब्धि के पीछे उनकी मां का अटूट समर्पण और संघर्ष छिपा है. एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली अनीता के पिता श्यामलाल देवड़ा खेती-किसानी करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अनीता की मां ने हार नहीं मानी. उन्होंने खेतों में मजदूरी की, पसीना बहाया और एक-एक रुपया जोड़कर अपनी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाया. मां की इसी मेहनत का नतीजा है कि आज अनीता देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर अधिकारी बन गई हैं.
ब्लॉक टॉपर से आईएएस तक का सफर
अनीता देवड़ा की शुरुआती शिक्षा भोपालगढ़ के सैनी स्कूल से हुई। 12वीं कक्षा में उन्होंने पूरे ब्लॉक में टॉप किया था, जिसके बाद परिवार ने उनके सपनों को उड़ान देने के लिए उन्हें दिल्ली भेजने का फैसला किया. दिल्ली में रहकर अनीता ने सालों तक कड़ा परिश्रम किया और धैर्य के साथ अपनी तैयारी जारी रखी. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने ऑल इंडिया 644वीं रैंक प्राप्त की.
परिवार में शिक्षा का माहौल
अनीता के परिवार में शिक्षा को हमेशा से प्राथमिकता दी गई है. उनके परिवार और रिश्तेदारों में कई बड़े अधिकारी मौजूद हैं. उनके चाचा चेतन देवड़ा एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं. इसके अलावा परिवार में एडीएम, प्रोफेसर और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी हैं, जिनसे अनीता को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही.
आज अनीता देवड़ा की सफलता पर न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा भोपालगढ़ और राजस्थान गर्व महसूस कर रहा है. उनकी यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो अभावों में रहकर बड़े सपने देखते हैं.
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