IIT से पढ़े, राजस्थान में रहे पावरफुल IAS... कौन हैं नए उच्च शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार? 1.16 करोड़ की सब्सिडी केस से आए थे सुर्खियों में

ललित यादव

24 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 24 2026 1:11 PM)

1994 बैच के राजस्थान कैडर IAS नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है. IIT से पढ़े गंगवार के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है. जून 2026 में उनकी मां, पत्नी और बेटे को सरकारी बागवानी योजना से 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा सब्सिडी मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी.

Naresh Pal Gangwar
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केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है. वह विनीत जोशी की जगह लेंगे. जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाया गया है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब NEET-UG पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं.

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नरेश पाल गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी हैं. प्रशासनिक सेवा में उनका तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है. हालांकि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके पुराने कार्यकाल और उनके परिवार को मिली सरकारी सब्सिडी से जुड़ा मामला भी फिर चर्चा में आ गया है.

IIT से पढ़े हैं नरेश पाल गंगवार

नरेश पाल गंगवार की गिनती उच्च शिक्षित नौकरशाहों में होती है. उन्होंने रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया है. इसके बाद IIT दिल्ली से कम्युनिकेशन एंड रडार इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की. उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में भी मास्टर डिग्री ली है.

गंगवार ने अपने प्रशासनिक करियर का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बिताया है. वह राजस्थान सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. केंद्र में आने के बाद भी उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालयों में जिम्मेदारी मिली.

उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाए जाने से पहले वह केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव पद पर कार्यरत थे. इससे पहले वह केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी भी रहे.

राजस्थान में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे

गंगवार राजस्थान सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी सहित कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं. उनका प्रशासनिक अनुभव जिला प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र सरकार तक फैला हुआ है.

साल 2001 में उन्हें टोंक का कलेक्टर बनाया गया. इसके बाद उन्होंने सवाई माधोपुर में कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाली. 2004 में झालावाड़, 2006 में जोधपुर और 2008 में भरतपुर के कलेक्टर रहे. इसी साल उन्हें एक बार फिर जोधपुर कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई.

अब उन्हें उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब देश की परीक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है. NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र विरोध कर रहे हैं. परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है.

हालांकि सरकार की ओर से जारी नियुक्ति आदेश में विनीत जोशी के तबादले को NEET विवाद से जोड़कर कोई कारण नहीं बताया गया है.

परिवार को 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी पर उठे थे सवाल

नरेश पाल गंगवार का नाम जून 2026 में एक अन्य मामले को लेकर चर्चा में आया था. इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, गंगवार की पत्नी, मां और बेटे को केंद्र सरकार की एक बागवानी योजना के तहत पांच साल के दौरान कुल 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली थी. रिपोर्ट के अनुसार, सभी प्रोजेक्ट राजस्थान के जयपुर जिले में थे.

यह सब्सिडी नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड यानी NHB की 'Development of Commercial Horticulture through Production and Post-Harvest Management of Horticulture Crops' योजना के तहत दी गई थी.

मां और बेटे को 46-46 लाख की सब्सिडी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सरकारी रिकॉर्ड के हवाले से बताया गया कि गंगवार की मां बिंदुमती के भासिंगपुरा गांव स्थित खीरा उत्पादन प्रोजेक्ट को जनवरी 2025 में 46.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. इस प्रोजेक्ट की लागत 99.38 लाख रुपये बताई गई थी.

उनके बेटे कुमार ऋत्विक के धानी बोराज गांव स्थित खीरा उत्पादन प्रोजेक्ट के लिए मार्च 2023 में 46.49 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 97.94 लाख रुपये थी. उस दौरान गंगवार पर्यावरण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पद पर तैनात थे.

वहीं, गंगवार की पत्नी डॉ. रंजीता सिंह 'एंड अदर्स' के नाम से दर्ज धानी बोराज के एक अन्य प्रोजेक्ट को 2021-22 में 24.36 लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी. इसकी कुल लागत करीब 49.31 लाख रुपये बताई गई. उस समय गंगवार राजस्थान सरकार में कृषि उत्पादन आयुक्त और प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत थे इन तीनों को जोड़ने पर सब्सिडी की रकम 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है.

गंगवार ने क्या दिया था जवाब?

वार्षिक अचल संपत्ति रिटर्न (DoPT) की जांच में सामने आया कि उन्होंने 2021-22 के रिटर्न में केवल एक प्रोजेक्ट का जिक्र किया था. इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए नरेश पाल गंगवार ने स्पष्ट किया था कि ऑल इंडिया सर्विसेज (Conduct) रूल्स, 1968 के तहत केवल उन परिजनों की संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य होता है जो पूरी तरह से अधिकारी पर निर्भर हों. उन्होंने बताया कि उनकी मां और बेटा उन पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं हैं और सेवा रिकॉर्ड में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है, इसलिए नियमों के तहत उनकी व्यक्तिगत संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य नहीं था.

मुश्किल समय में मिली उच्च शिक्षा की कमान

नरेश पाल गंगवार की नई जिम्मेदारी इसलिए भी अहम है क्योंकि उच्च शिक्षा विभाग के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं. NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के प्रदर्शन के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बड़ा मुद्दा बनी हुई है.

ऐसे में राजस्थान से लेकर केंद्र तक लंबा प्रशासनिक अनुभव रखने वाले गंगवार पर उच्च शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार से जुड़े अहम फैसलों की जिम्मेदारी होगी. वहीं, नई नियुक्ति के बाद उनके परिवार को मिली 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी सब्सिडी का पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है.