'पिता ने घर बेचा...कर्ज लिया'! बेटे ने 27 गेंदों में नाबाद 54 रन बनाकर दिखा दिया जलवा! झुंझुनूं के मुकुल चौधरी की कहानी आसान नहीं

झुंझुनूं के 21 वर्षीय मुकुल चौधरी ने IPL 2026 में शानदार पारी खेलकर LSG को KKR पर जीत दिलाई. 27 गेंदों में 54 रन बनाकर उन्होंने हारते मैच को पलट दिया. यह कहानी एक किसान परिवार के बेटे की मेहनत, संघर्ष और पिता के सपने को सच करने की मिसाल है.

Mukul Chaudhary
Mukul Chaudhary

न्यूज तक डेस्क

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आईपीएल 2026 में झुंझुनूं के 21 वर्षीय मुकुल चौधरी ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ऐतिहासिक पारी खेलकर लखनऊ सुपर जायंट्स को असंभव जीत दिलाई. 182 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जब लखनऊ ने 128 पर 7 विकेट गंवा दिए थे, तब मुकुल ने मात्र 27 गेंदों में नाबाद 54 रन (7 छक्के) कूटकर मैच पलट दिया. किसान परिवार से आने वाले मुकुल ने यह जीत अपने पिता के सपने और परिवार के संघर्ष को समर्पित की है.

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पिता का सपना और मुकुल का विस्फोट!

IPL 2026 के एक रोमांचक मुकाबले में शुक्रवार की रात एक नया सितारा चमका. नाम है मुकुल चौधरी.  राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी गांव के 21 साल के मुकुल दलिप चौधरी ने ईडन गार्डन्स की चमकती रोशनी में वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद खुद कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने भी नहीं की होगी. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए खेलते हुए मुकुल ने हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया.

हार के मुंह से खींची जीत

182 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही लखनऊ की टीम 15वें ओवर तक 128 रन पर 7 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी. स्टेडियम में केकेआर की जीत का जश्न शुरू हो चुका था. तभी क्रीज पर आए मुकुल चौधरी ने गियर बदला. उन्होंने महज 27 गेंदों में नाबाद 54 रनों की तूफानी पारी खेली. मुकुल ने अपनी पारी में 7 गगनचुंबी छक्के जड़े और 200 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए केकेआर के गेंदबाजों को पस्त कर दिया. उन्होंने आवेश खान के साथ 8वें विकेट के लिए सिर्फ 22 गेंदों में 54 रनों की मैच जिताऊ साझेदारी की.

पिता का अनूठा सपना और संघर्ष

मुकुल की सफलता के पीछे उनके पिता दलिप कुमार चौधरी का जुनून है. मुकुल बताते हैं, "मेरे पिता ने मेरी शादी से पहले ही सोच लिया था कि बेटा होगा तो उसे क्रिकेटर बनाऊंगा."

आर्थिक तंगी के बावजूद पिता ने मुकुल को सीकर की SBS एकेडमी में भेजा. बाद में बेहतर सुविधाओं के लिए मुकुल जयपुर शिफ्ट हुए, जहां उनके करियर को नई दिशा मिली. मुकुल की मां और बहन ने भी उनका पूरा साथ दिया और उनके साथ जयपुर शिफ्ट हो गईं ताकि वह खेल पर ध्यान दे सकें.

विकेटकीपर बनने का इत्तेफाक

दिलचस्प बात यह है कि मुकुल ने अपने करियर की शुरुआत एक मीडियम फास्ट बॉलर के तौर पर की थी. करीब 10 साल पहले एक मैच के दौरान टीम को विकेटकीपर की जरूरत पड़ी. मुकुल ने ग्लव्स थामे और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज वे एक शानदार फिनिशर और विकेटकीपर बल्लेबाज हैं.

2.60 करोड़ की कीमत को किया सही साबित

नीलामी में लखनऊ ने मुकुल को 30 लाख के बेस प्राइस से बढ़ाकर 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा था. घरेलू क्रिकेट (U-23 और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी) में 100 से ज्यादा की औसत और ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर उन्होंने अपनी जगह बना . मुकुल एमएस धोनी को अपना आदर्श मानते हैं और अपनी सफलता का श्रेय परिवार के त्याग को देते हैं.

कर्ज उतारना पहली जिम्मेदारी

एक इंटरव्यू में जब मुकुल से पूछा गया कि वह इन पैसों का क्या करेंगे. इस पर मुकुल ने जवाब दिया कि वह पहले अपना  कर्ज उतारेंगे. मुकुल बताते हैं कि पिता ने कर्ज लेकर खिलाया है पहले वह कर्जा उतारना है. पिता ने होटल का बिजनेस किया फिर होटल पर लोन लेकर उन्हें क्रिकेट खिलाया. मुकुल अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं और कहते हैं मुझे कुछ चीज नहीं खरीदनी. हमारे पास खुद का घर भी नहीं है, घर बनाना है. पिता ने मुझे आगे बढ़ाने के लिए घर भी बेच दिया था.
 

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