Rajya Sabha Polls Rajasthan: राजस्थान में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए निवर्तमान सांसद नीरज डांगी को लगातार दूसरी बार अपना उम्मीदवार घोषित किया है. राजस्थान विधानसभा के मौजूदा संख्या बल (67 विधायक) को देखते हुए कांग्रेस की इस एक सीट पर जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीरज डांगी को दोबारा मौका देकर कांग्रेस आलाकमान ने राज्य में अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को मजबूत करने और पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने का एक बड़ा सियासी दांव खेला है.
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18 जून को मतदान, निर्विरोध निर्वाचन के आसार
राजस्थान की 3 राज्यसभा सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान प्रक्रिया होगी और इसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे. दरअसल, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, बीजेपी सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है, जिससे ये सीटें खाली हो रही हैं.
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इन सीटों पर चुनाव निर्विरोध होने की पूरी संभावना है. माना जा रहा है कि बीजेपी अपने संख्या बल के हिसाब से 2 और कांग्रेस 1 सीट पर ही उम्मीदवार उतारेगी. अगर कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं आता है तो 11 जून को नाम वापसी की आखिरी तारीख के दिन ही तीनों उम्मीदवारों के निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा हो जाएगी.
पर्दे के पीछे खड़गे और गहलोत का साथ
नीरज डांगी को दोबारा टिकट मिलने के पीछे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मजबूत पैरवी मानी जा रही है. डांगी को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बेहद भरोसेमंद माना जाता है. वहीं, पिछले कार्यकाल के दौरान राज्यसभा में रहने के कारण कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी उनकी नजदीकियां काफी बढ़ी हैं. सियासी गलियारों में चर्चा है कि खुद खड़गे ने डांगी के नाम पर अंतिम मुहर लगवाने में अहम भूमिका निभाई है.
3 चुनाव हारने के बाद पर पार्टी को भरोसा
नीरज डांगी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. वे रेवदर विधानसभा सीट से साल 2003 (देसूरी), 2008 और 2018 (रेवदर सीट) में लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं. हालांकि, चुनावी हार के बाद भी पार्टी ने हमेशा उन पर भरोसा जताया. यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले डांगी संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. उनके पिता दिनेशराय डांगी भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं. संगठन के प्रति डांगी की इसी निष्ठा को देखते हुए पार्टी ने 2020 में उन्हें पहली बार उच्च सदन भेजा था और अब एक बार फिर उन पर दांव खेला है.
क्या है जीत का गणित?
राजस्थान विधानसभा के मौजूदा समीकरणों के मुताबिक, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 51 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है. इस लिहाज से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में आसानी से दो सीटें जा रही हैं. बीजेपी के लिए तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारना बेहद जोखिम भरा है, क्योंकि इसके लिए उसे अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों के 35 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान राजनीतिक हालात में नामुमकिन नजर आता है.
आरएलडी पहले से ही बीजेपी के साथ है, लेकिन अगर बीजेपी निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के विधायकों का समर्थन जुटा भी लेती है, तब भी तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसके पास करीब 20 वोट कम पड़ जाएंगे. यही वजह है कि दोनों ही दल बिना किसी अतिरिक्त जोड़-तोड़ के अपने तय संख्या बल के आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं.
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