यूपी-बिहार से लेकर हरियाणा तक...जहां पैर रखे, वहां बीजेपी को जिताया; कौन हैं सतीश पूनिया, जिन्हें राज्यसभा भेज रही भाजपा

बीजेपी राजस्थान के बड़े जाट नेता डॉ. सतीश पूनिया को राज्यसभा भेज रही है. पूनिया 2023 का विधानसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन उनके पास संगठन चलाने का कमाल का हुनर है. उन्होंने हरियाणा, यूपी और बिहार जैसे कई राज्यों के चुनावों में बीजेपी को बड़ी जीत दिलाई है.

satish poonia
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न्यूज तक डेस्क

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बीजेपी ने राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर ली है. बुधवार को बीजेपी ने उनके नाम की भी घोषणा कर दी. साल 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में आमेर सीट से बेहद कम अंतर से हारने के बाद पूनिया का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया है. पार्टी के भीतर उन्हें 'संगठन का इंजीनियर' कहा जाता है, जिन्होंने देश के कई राज्यों में बीजेपी की जीत की पटकथा लिखी है.

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एबीवीपी से शुरू हुआ था सियासी सफर

सतीश पूनिया की राजनीति की नींव साल 1984 में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से पड़ी थी. कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने संगठन के कामों में गहरी रुचि दिखाई. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने पार्टी के भीतर धीरे-धीरे अपनी एक खास पहचान बनाई. उनकी कुशल कार्यशैली को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने उन्हें लगातार प्रमोट किया.

युवा मोर्चा से लेकर प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक

साल 1992 से 1998 के बीच सतीश पूनिया भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रहे. इसके ठीक बाद साल 1998 में उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया. युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय होने के कारण साल 2003 में उन्हें मुख्य पार्टी में प्रदेश महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी मिली. इस दौरान उन्होंने राजस्थान के कोने-कोने में जाकर बूथ स्तर पर भाजपा को मजबूत किया.

पूनिया के राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा मोड़ साल 2019 में आया, जब भाजपा ने उन्हें राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. उनके इस कार्यकाल में पार्टी ने जमीन पर कई बड़े अभियान चलाए. इसके अलावा वह 15वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रहे और सदन में जनता की आवाज उठाई. हालांकि चुनाव से ठीक एक साल पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था. 

अब मिली राज्यसभा की नई जिम्मेदारी

सतीश पूनिया वर्तमान में हरियाणा भाजपा के प्रदेश प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उनके इसी लंबे संगठनात्मक और चुनावी मैनेजमेंट के अनुभव को देखते हुए भाजपा आलाकमान ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने पूनिया के सालों के समर्पण और वफादारी का इनाम दिया है. अब सतीश पूनिया देश की संसद में राजस्थान की पैरवी करते हुए नजर आएंगे.

हरियाणा में पलट दी थी हारी हुई बाजी

सतीश पूनिया की सांगठनिक क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण हरियाणा विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. जुलाई 2024 में उन्हें हरियाणा का प्रदेश प्रभारी बनाया गया था, जबकि इससे पहले लोकसभा चुनाव में वे चुनाव प्रभारी थे. हरियाणा में जहां तमाम एग्जिट पोल बीजेपी की हार का दावा कर रहे थे, वहां पूनिया के चुनावी मैनेजमेंट ने लगातार तीसरी बार पार्टी की सरकार बनवाई. लोकसभा चुनाव में भी उनके नेतृत्व में पार्टी ने 10 में से 5 सीटों पर जीत दर्ज की.

5 राज्यों के चुनाव में दिखा चुके हैं अपना दम

डॉ. सतीश पूनिया सिर्फ राजस्थान, हरियाणा ही नहीं बल्कि कई राज्यों में अपनी कार्यकुशलता से बीजेपी को जीत दिलवाने में मदद की. 

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी के आर्यन मान को अध्यक्ष बनाने में पूनिया की बड़ी भूमिका रही. उन्होंने जाट और किसान बेल्ट के छात्र गुटों को एकजुट किया.

यूपी चुनाव में उन्हें अलीगढ़ संभाग का प्रभार मिला था, जहां की सभी 7 सीटों पर बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया.

बिहार चुनाव के समय वे राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष थे, लेकिन उन्होंने सीमांचल और मिथिलांचल जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में धुआंधार रैलियां कर एनडीए उम्मीदवारों को जीत दिलाई.

हालिया पश्चिम बंगाल चुनावों में भी बीजेपी आलाकमान ने पूनिया को स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल और सांगठनिक मजबूती की अहम जिम्मेदारी सौंपी.

ओबीसी और जाट समुदाय का बड़ा चेहरा

राजस्थान की राजनीति में जाट और ओबीसी वर्ग सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है. सतीश पूनिया इस वर्ग के सर्वमान्य नेताओं में से एक हैं. हाल के दिनों में जाट वोट बैंक में आए राजनीतिक बदलावों को देखते हुए, बीजेपी के लिए इस बड़े वर्ग को एक मजबूत संदेश देना जरूरी था. पूनिया को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने इस बड़े कोर वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. आमेर चुनाव हारने के बाद से ही संगठन में उन्हें बड़ा पद देने की मांग लगातार उठ रही थी.

सादगी पसंद और जमीनी नेता की छवि

सतीश पूनिया की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है. पश्चिमी राजस्थान के दौरों के दौरान उनकी ऊंट गाड़ी की सवारी करते हुए और पशुपालकों व किसानों की समस्याएं सुनते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किए गए थे. एक दलित परिवार के घर जमीन पर बैठकर भोजन करने की उनकी तस्वीरों ने आम जनता के बीच उनकी पैठ को मजबूत किया. बिना किसी पद के लालच के लगातार काम करने का इनाम अब पार्टी उन्हें संसद के उच्च सदन में भेजकर दे रही है.

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