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टोंक जिला राजनैतिक दृष्टि से हमेशा ही काफी चर्चित रहा है.यह वह जिला है जहां स्थित वनस्थली विद्यापीठ स्थापित कर महिला शिक्षा की अलख जगाने वाले पंडित हीरालाल शास्त्री प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने.लेकिन यह जिला प्रदेश को दो उपमुख्यमंत्री बनवारी लाल बैरवा और सचिन पायलट दिये जाने की वजह से भी राजनैतिक दृष्टि से हमेशा चर्चित बना रहा.वर्तमान समय में टोंक जिला टोंक विधानसभा क्षेत्र के विधायक व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की वजह से भी पूरे प्रदेश में चर्चित बना रहा.पायलेट के राजनैतिक कद का इस बात से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वर्तमान में सिर्फ विधायक रहते हुए भी वे पूरे प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं में सबसे लोकप्रिय व राजनीति के केंद्र बिंदू बने रहे.चाहे बात कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई की हो ,चाहे पेपरलीक मामले में युवाओं को न्याय दिलवाने के लिये शुरू की गई लड़ाई की। और तो और पायलट अपनी सरकार व मुख्यमंत्री गहलोत के विरूद्ध भी आवाज़ उठाने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाये.अगर जिले की राजनीति की बात करें तो यहां के चार में से तीन विधानसभा क्षैत्रों में पायलट की राजनैतिक पकड़ काफी गहरी नज़र आती रही है. सचिन पायलट ने 2018 में टोंक से चुनाव लड़ा था. टोंक विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल मानी जाती है. यहां बीजेपी ने भी उनके खिलाफ यूनुस खान को मैदान में उतारा था. इधर अब AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी राजस्थान के दौरे बढ़ा रहे है. हाल ही में उन्होनें टोंक से पार्टी उम्मीदवार खड़े करने के संकेत भी दिए थे. ऐसे में अगर मुस्लिम बहुल टोंक सीट पर ओवैसी प्रत्याशी खड़ा करते है तो पायलट के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है. 2018 के चुनाव परिणाम
पिछले विधानसभा चुनाव में टोंक सीट पर बीजेपी की तरफ से यूनुस खान मैदान में थे. यूनुस खान एक मात्र वो शख्स थे. जिस मुस्लिम को बीजेपी ने टिकट दिया. पायलट के सामने करीब 54 हजार वोटों से वो हार गए थे. यूनुस खान वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते है. राजे के वीटो से ही उनको टिकट मिल पाया था.
क्या है टोंक विधानसभा का गणित
टोंक विधानसभा में कुल वोटर 2 लाख के ऊपर है. इसमें करीब 60 हजार मुस्लिम वोटर है. इसके बाद दूसरे नंबर पर गुर्जर मतदाता है. गुर्जर करीब 30 हजार है. ऐसे में अगर ओवैसी अपना प्रत्याशी उतारते है तो सचिन पायलट के लिए मुश्किलें हो सकती है. औवेसी ने तो पायलट को हाल में नसीहत भी दी थी कि वो गुर्जर बहुल इलाके में जाकर चुनाव लड़े. अब मालपुरा विधानसभा की बात करें तो यहां से भाजपा के कन्हैयालाल चौधरी दूसरी बार विजयी हुए.2013में यहां से भाजपा के कन्हैयालाल चौधरी लगभग 43,221मतों से विजयी हुए थे.दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी रणवीर पहलवान रहे.कांग्रेस नें यहां रालोद के साथ हुए गठबंधन के चलते अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था.मालपुरा विधानसभा क्षैत्र के प्रारंभ के चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा है.यहां से प्रदेश के पहले गृहमंत्री रहे दामोदर व्यास व बाद में उनके पुत्र सुरेंद्र व्यास 3-3बार विधायक रहे.बाद में यहां से 2बार जनता पार्टी,1बार स्वतंत्र पार्टी,3बार भाजपा व 2बार निर्दलीयों नें यहां से जीत हांसिल की.निर्दलीय चुनाव जीतने वालों में यहां से चौथी बार विधायक बने सुरेंद्र व्यास व रणवीर पहलवान शामिल रहे हैं ।मालपुरा को जिला नहीं बनाये जाने का मुद्दा कांग्रेस के लिये गले की फांस बना हुआ है.भाजपा विधायक चौधरी इस मुद्दे को भरपूर रूप से भुनाये जाने के मूड में नज़र आ रहे हैं.टिकिट की दावेदारी में भी चौधरी सब पर भारी पड़ सकते हैं.हांलांकि औद्योगिकरण की धीमी गति,चिकित्सकों की कमी,जर्जर ग्रामीण सड़कें व पेयजल की कमी यहां की मुख्य समस्या है। प्रत्याशी यहां विकास कराये जाने के दावों को लेकर फिर से चुनाव मैदान में नज़र आयेगें.
अब देवली उनियारा विधानसभा की बात करें तो कांग्रेस के हरीश चंद्र मीणा लगभग 42हज़ार मतों से विजयी हुए थे।और भाजपा के पूर्व विधायक राजेंद्र गुर्जर को पराजित किया था.भाजपा की पराजय में बाग़ी भाजपाई-उदयलाल गुर्जर की मुख्य भूमिका रही.तो वहीं 2013में यहां से भाजपा के राजेंद्र गुर्जर ने कांग्रेस के दिग्गज व विधानसभा उपाध्यक्ष को 29335 मतों से पराजित किया था. अब तक हुए 15विधानसभा चुनावों में 2बार रामराज्य परिषद,2बार स्वतंत्र पार्टी,4बार कांग्रेस,3बार जनता पार्टी व 4बार भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए.यहां की राजनीती का ताना बाना हमेशा से उनियारा ठिकाने के सरदार सिंह,रावराजा राजेंद्र सिंह व दिग्विजय सिंह के चारों तरफ बुना जाता रहा था.इस परिवार के तीनों सदस्यों ने रामराज्य परिषद,कांग्रेस व जनता पार्टी से जीत हांसिल की.दिग्विजय सिंह यहां से 2बार स्वतंत्र पार्टी,1बार कांग्रेस पार्टी व 3बार जनता पार्टी से विजयी हो यहां अपना दबदबा बनाये रहे। लेकिन इस परिवार का दबदबा 2008में दिग्विजय सिंह का टिकिट काटे जाने के साथ ही लगभग समाप्त हो गया.कांग्रेस नें 2018में यहां से पैराशूट प्रत्याशी के रूप में दौसा सांसद हरीश मीणा को मैदान में उतारा था ।जो वर्तमान में यहां के विधायक हैं.हरीश चंद्र मीणा पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के काफी नज़दीकी माने जाते रहे हैं.
Interesting contest on all the three seats of Tonk! How will BJP be able to overcome Pilot?
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