राजस्थान में राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव होना है. साथ ही विधानसभा की 6 सीटों पर भी उपचुनाव की तैयारी है. जिसे लेकर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है. अब बीजेपी ने भी इसे लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है. लोकसभा चुनाव में राजस्थान में 11 सीटों पर हार के बाद अब सीएम भजनलाल शर्मा के लिए कड़ा इम्तिहान है. ऐसे में सभी 6 सीटों पर जीत के लिए पार्टी के भीतर जातिगत समीकरण पर भी काम किया जा रहा है. चुनावी रणनीति को लेकर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की.
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सूत्रों के मुताबिक इस दौरान राजस्थान में कैबिनेट विस्तार और संगठन में बदलाव की योजना बनाई जा रही है. ताकि आगामी उपचुनाव से पहले सभी वर्गों का साधा जा सके. बता दें कि राजस्थान में अब 5 की बजाय 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव करवाया जाएगा.
इससे पहले लोकसभा चुनाव में 5 विधायकों के सांसद बन जाने के बाद प्रदेश में विधानसभा की 5 सीटें खाली हो गई थी. जिसके कारण इन सीटों पर उपचुनाव करवाया जाना है, लेकिन संलूबर विधायक अमृतलाल मीणा की मौत के बाद यह सीट भी खाली हो गई है. इस सीट पर साल 2013 से अब तक बीजेपी का कब्जा रहा है.
इन 5 सीटों पर भी होने हैं उपचुनाव
वहीं, राजस्थान के 5 पूर्व विधायकों के लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद इन सीटों पर भी उपचुनाव की तैयारी है. देवली-उनियारा, खींवसर, झुंझुनू, दौसा और चौरासी सीटों पर उपचुनाव होने हैं. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 3 सीट कांग्रेस, 1-1 आरएलपी और बाप पार्टी ने जीती थी. जाहिर तौर पर बीजेपी के पास सीटें जीतकर ताकत बढ़ाने का अच्छा मौका है.
गौरतलब है कि नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, झुंझुनू सांसद बृजेंद्र ओला, बांसवाड़ा-डूंगरपुर राजकुमार रोत, दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा और टोंक-सवाई माधोपुर सांसद हरीश मीणा के चुनाव जीतने के बाद देवली-उनियारा, खींवसर, झुंझुनू, दौसा और चौरासी विधानसभा सीट खाली हुई है.
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