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हनुमानगढ़ में अगर बाढ़ आती है तो इसके लिए जिम्मेदार यहां का प्रशासन व सिंचाई विभाग होगा। जी हां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद आज तक प्रशासन ने उनके आदेशों की पालना नहीं की। गौरतलब है कि 1995 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिया गया था कि घग्गर नदी का जो बहाव क्षेत्र है। वह 6 बीघा यानी करीब 980 फीट होना चाहिए लेकिन किसानों द्वारा यहां अतिक्रमण करके इस बहाव क्षेत्र को बहुत कम 1 बीघा तक ही सीमित कर दिया है। और जब कभी भी नदी में पानी आता है तो बाढ़ का खतरा बन जाता है जो कि वर्तमान समय में बना हुआ है, हालांकि प्रशासन इस आपदा से निपटने की तैयारियों में जुटा हुआ है। लोगों से समझाइश की जा रही है उनके लिए राहत शिविर बनाए जा रहे हैं लेकिन अगर वे समय रहते कोर्ट की आदेशों की पालना कर देते तो आज यह स्थिति नहीं होती हमने ग्राउंड जीरो पर जाकर स्थिति का जायजा लिया तो कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने निकल कर आए। इस मामले में अधिवक्ता जोधा सिंह का कहना है कि सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार यहां का प्रशासन है उनके खिलाफ अदालत के आदेशों की अवहेलना का मामला दर्ज होना चाहिए और जिस तरह से प्रशासन अब लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं अगर प्रशासन अपना काम यानी कि कोर्ट के आदेशों की पालना कर देता तो आज ही हालत नहीं होती। लोग इतना मानसिक तौर पर परेशान हो चुके हैं कि उन्हें खतरा सता रहा है, कि जिस तरह से 1995 में जब हनुमानगढ़ में बाढ़ आई थी तो काफी नुकसान हुआ था। लोगों को भय सता रहा है रातों की नींद उड़ी हुई है अगर बाढ़ आ जाती है तो इसके लिए यहां का प्रशासन सींचाई विभाग जिम्मेदार है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
Why is the administration bent on bringing floods in Hanumangarh even after the Supreme Court’s warning?
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