ओडिशा राज्य में चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है. आपको बता दें, हिंदू देवता सूर्य को समर्पित यह एक विशाल मंदिर है, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में देश-विदेश से सैलानी आते हैं. 13वीं शताब्दी के मध्य में बना यह मंदिर कलात्मक भव्यता और इंजीनियरिंग की निपुणता का एक महान संगम है. तो चलिए आज हम आपको कोणार्क सूर्य मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, मंदिर के खुलने का समय, मंदिर में प्रवेश के लिए टिकट की कीमत और यहां तक पहुंचने के विभन्न साधनों के बारे में बताते हैं.
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कोणार्क सूर्य मंदिर के बारे में रोचक तथ्य-
- कोणार्क मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में गंग वंश के महान शासक राजा नरसिंहदेव प्रथम (1238-1250 ई.) द्वारा किया गया था.
- इस मंदिर का निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों और काले ग्रेनाइट के पत्थरों से किया गया है. इस मंदिर में प्रत्येक दो पत्थरों के बीच में एक लोहे की चादर लगी हुई है. मंदिर की ऊपरी मंजिलों का निर्माण लोहे की बीमों से हुआ है. वहीं, मुख्य मंदिर की चोटी के निर्माण में 52 टन चुंबकीय लोहे का उपयोग हुआ है. माना जाता है कि मंदिर का पूरा ढांचा इसी चुंबक की वजह से समुद्र की गतिविधियों को सहन कर पाता है.
- बता दें, इस मंदिर के निर्माण में 1200 कुशल शिल्पियों ने 12 साल तक काम किया लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया. ये भी बताया जाता है कि मुख्य शिल्पकार दिसुमुहराना के बेटे धर्मपदा ने निर्माण पूरा किया और मंदिर बनने के बाद उन्होंने चंद्रभागा नदी में कूदकर जान दे दी.
- कोणार्क सूर्य मंदिर को रथ आकार में बनाया गया है जिसमें 12 जोड़ी पहिए हैं, जो साल के 12 महीनों का प्रतीक हैं. और इस रथ को सात घोड़े खींच रहे हैं. ये सात घोड़े सात दिनों को दर्शाते हैं. वहीं, इन पहियों में से 4 पहिए इस तरह बनें हैं कि ये दिन में आपको समय बता सकते हैं.
- आपको बता दें, इस मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि सूर्य की पहली किरणें पूजा स्थल और भगवान की मूर्ति पर पड़ती हैं.
- कोणार्क सूर्य मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दो विशाल शेर स्थापित किए गए हैं. इन शेरों द्वारा हाथी को कुचलता हुआ प्रदर्शित किया गया है और प्रत्येक हाथी के नीचे मानव शरीर है.
- इस मंदिर को ब्लैक पैगोडा नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मंदिर का ऊंचा टॉवर काला दिखाई देता है.
- इस मंदिर को साल 1984 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था.
जानिए कोणार्क सूर्य मंदिर के खुलने का समय और टिकट की कीमत के बारे में-
जानकारी के मुताबिक, कोणार्क सूर्य मंदिर पर्यटकों के लिए सुबह 6 बजे से शाम के 8 बजे तक सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है. वहीं इसके टिकटों की बात करें तो आपको बता दें कि सूर्य मंदिर में प्रवेश के लिए टिकट की कीमत विदेशी और भारतीय पर्यटकों के लिए अलग-अलग है. विदेशी पर्यटकों के लिए प्रति व्यक्ति 600 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि भारतीय नागरिकों के लिए टिकट की कीमत 40 रुपये प्रति व्यक्ति है.
आपको बता दें, यहां एक घंटे का लाइट शो भी संचालित किया जाता है, जो कि शाम 7 बजे से शुरू होता है.
कैसे पहुंचें कोणार्क सूर्य मंदिर?
यह एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है और इसलिए यह हवाई, रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. ऐसे में आप अपने सुविधानुसार किसी भी माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं.
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