देश में नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को फिलहाल टोल टैक्स से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली बंद करने या टोल प्लाजा खत्म करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है. हालांकि, आने वाले समय में टोल वसूली की व्यवस्था को और आधुनिक और ऑनलाइन बनाने की तैयारी है.
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संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने टोल टैक्स को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की. समाजवादी पार्टी के नेता और आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस मुद्दे पर सरकार से सवाल किया था.
टोल प्लाजा खत्म करने का फिलहाल कोई प्लान नहीं
संसद में पूछे सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने बताया कि फिलहाल नेशनल हाईवे से टोल टैक्स हटाने या टोल प्लाजा पूरी तरह समाप्त करने की योजना नहीं है. हालांकि, सरकार टोल वसूली के सिस्टम में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.
आने वाले समय में टोल व्यवस्था को ऑनलाइन और अधिक सुविधाजनक बनाने की तैयारी है. इसका मकसद हाईवे पर वाहन चालकों के सफर को आसान बनाना और टोल भुगतान की प्रक्रिया को बेहतर करना है.
हाईवे बनने के बाद कब तक देना होगा टोल?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत बनाए गए हाईवे पर संबंधित कंपनी तय कंसेशन अवधि तक टोल वसूलती है. यह अवधि खत्म होने के बाद हाईवे सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी के पास आ जाता है.
इसके बावजूद टोल वसूली बंद होना जरूरी नहीं है. मौजूदा नियमों के तहत सरकार या अधिकृत एजेंसी आगे भी टोल वसूल सकती है. इतना ही नहीं, सरकारी फंड से बनाए गए नेशनल हाईवे पर भी नियमों के अनुसार टोल लिया जाता है.
व्हीकल टैक्स देने के बाद टोल क्यों?
संसद में यह मुद्दा भी उठा कि वाहन मालिक पहले ही व्हीकल टैक्स देते हैं, तो उनसे अलग से टोल शुल्क क्यों लिया जाता है?
सरकार के मुताबिक, व्हीकल टैक्स और टोल शुल्क दो अलग व्यवस्थाएं हैं. व्हीकल टैक्स राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार लगाया जाता है. वहीं, वाहन रजिस्ट्रेशन फीस केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत निर्धारित होती है.
दूसरी ओर, नेशनल हाईवे पर लिया जाने वाला टोल एक तरह की यूजर फीस है. यानी राष्ट्रीय राजमार्ग की सुविधा का इस्तेमाल करने के बदले वाहन चालकों से यह रकम ली जाती है. इसकी व्यवस्था नेशनल हाईवे शुल्क नियम, 2008 के तहत की गई है.
प्राइवेट कंपनी के हटने के बाद भी जारी रह सकता है टोल
जिन हाईवे परियोजनाओं का निर्माण निजी कंपनियों की भागीदारी से किया जाता है, वहां कंसेशन एग्रीमेंट के तहत तय अवधि तक निजी कंपनी टोल वसूलती है.
कंसेशन अवधि खत्म होने के बाद टोल प्लाजा सरकार या अधिकृत एजेंसी को सौंप दिया जाता है. इसके बाद भी लागू नियमों के अनुसार टोल की वसूली जारी रह सकती है.
यानी किसी हाईवे की निर्माण लागत पूरी हो जाने या निजी कंपनी की तय अवधि समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि वहां टोल अपने आप खत्म हो जाएगा.
टोल से मिले पैसे का सरकार क्या करती है?
सरकार के मुताबिक, टोल से मिलने वाली राशि सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सरकार की ओर से वसूला गया शुल्क भारत की संचित निधि यानी Consolidated Fund of India में जमा होता है.
इसके बाद बजट आवंटन के जरिए धन का इस्तेमाल नेशनल हाईवे के रखरखाव, मरम्मत, चौड़ीकरण और विकास जैसे कार्यों के लिए किया जाता है. नई सड़क परियोजनाओं और बेहतर हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में भी सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल होता है.
क्या आगे भी देना पड़ेगा टोल टैक्स?
फिलहाल सरकार की ओर से दिए गए जवाब से साफ है कि नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स खत्म करने की कोई योजना नहीं है. सरकार टोल वसूली की व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय इसे तकनीक के जरिए अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
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