UP: केके बिश्नोई की रिसेप्शन में गए विधायकों का कटेगा टिकट, बरसे अखिलेश यादव, जानें क्या कहा

अखिलेश यादव संभल एसपी के रिसेप्शन में शामिल होने वाले अपने तीन विधायकों से नाराज हैं और उन्हें नसीहत देने की बात कही है. वहीं, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने खुद को 'बेहया' बताते हुए गरीबों के लिए किसी से भी लड़ने का दावा किया है.

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव

रजत सिंह

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उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों 'शादी' और 'शपथ' दो बड़े चर्चा के केंद्र बने हुए हैं. एक तरफ समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों का संभल एसपी की शादी में जाना अखिलेश यादव को रास नहीं आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का एक नया और विवादित बयान सुर्खियां बटोर रहा है.

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अखिलेश यादव की नाराजगी

हाल ही में संभल के चर्चित एसपी के.के. विश्नोई और बरेली की एसपी (साउथ) अंशिका वर्मा की शादी और उसके बाद जोधपुर में हुआ रिसेप्शन सोशल मीडिया पर छाया रहा, लेकिन इस निजी कार्यक्रम ने राजनीतिक गलियारों में तब हलचल मचा दी जब इसमें सपा के तीन विधायक- नवाब इकबाल महमूद, राम खिलाड़ी यादव और पिंकी यादव शामिल हुए.

नाराजगी की वजह: अखिलेश यादव ने संभल हिंसा के बाद पुलिस प्रशासन और खासकर के.के. विश्नोई के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था. ऐसे में अपने ही विधायकों का उनके रिसेप्शन में जाना अखिलेश को नागवार गुजरा.

टिकट पर संकट? प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश ने कहा कि इन विधायकों को नसीहत दी जाएगी और निर्देश होने के बावजूद वे कार्यक्रम में शामिल हुए. अब सवाल उठ रहा है कि क्या आगामी चुनावों में इनका टिकट कट सकता है?

बर्क बनाम नवाब की जंग: संभल की राजनीति में 'नवाब' (इकबाल महमूद) और 'बर्क' (सांसद जियाउर्रहमान बर्क) के परिवारों की पुरानी अदावत है. जानकारों का मानना है कि इकबाल महमूद का टिकट काटना आसान नहीं होगा क्योंकि उनके पास हिंदू और मुस्लिम दोनों वर्गों का समर्थन है.

ओम प्रकाश राजभर का नया दांव

पूर्वांचल के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर अपने बेबाक और कभी-कभी अजीबोगरीब बयानों के लिए जाने जाते हैं. एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने खुद को 'बेहया' और 'मनबढ़' बताया.

राजभर का बयान: उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं राजभर मानने वाला नेता नहीं है, बहुत मनबढ़ है. हां, मैं बेहया हूं क्योंकि मुझे गरीबों को न्याय दिलाना है."

मुख्यमंत्री को चुनौती या तारीफ? राजभर ने आगे कहा कि चाहे डीएम से लड़ना हो, मुख्यमंत्री से या डीजीपी से, वे गरीबों के हक के लिए किसी से भी भिड़ सकते हैं. उनके इस बयान के पीछे के सियासी मायनों की खूब चर्चा हो रही है कि क्या यह महज बयानबाजी है या गठबंधन के भीतर किसी बदलाव का संकेत.

 

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