उत्तर प्रदेश के शामली जिले का मोनू कश्यप हत्याकांड अब एक बड़े सियासी और कानूनी बवाल में तब्दील हो चुका है. जसाला गांव के रहने वाले मोनू कश्यप की हत्या के मामले में जहां एक तरफ इंसाफ की मांग तेज है वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) की कैराना सांसद इकरा हसन के खिलाफ पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज किए जाने के बाद मामला और गरमा गया है.
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इस बीच, मृतक मोनू कश्यप की मां ने सपा सांसद इकरा हसन का खुलकर साथ दिया है और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मोनू की मां हाल ही में सांसद इकरा हसन के साथ लखनऊ में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मिलकर लौटी हैं, जहां उन्हें न्याय का बड़ा आश्वासन मिला है.
हमारा हाथ पकड़कर बाहर निकाला
लखनऊ से लौटने के बाद मीडिया से बात करते हुए मृतक मोनू कश्यप की मां ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भारी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, "इकरा हसन जी हमारे साथ खड़ी हैं और उन्होंने मुझे इंसाफ दिलाने की बात कही है. जब मैं शिकायत लेकर डीआईजी (DIG) के पास गई थी, तो उन्होंने और उनकी मैडम ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे बाहर निकाल दिया. पुलिस वालों ने कहा कि यहां हंगामा मत करो, तुमने भीड़ इकट्ठा कर दी है."
मोनू की मां ने आगे आरोप लगाया, "पुलिस ने मेरे साथ गए चार-पांच लोगों को बंद कर दिया और मुझे भी दो-तीन घंटे थाने के भीतर बैठा कर रखा. मैं पुलिस की इस कार्रवाई से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं. मैं सिर्फ अपने बेटे के कातिलों के लिए इंसाफ चाहती हूं और यह जानना चाहती हूं कि उसे किस हथियार से काटा गया."
इकरा हसन की दोटूक
इस पूरे मामले में पुलिस ने उपनिरीक्षक संजय कुमार शर्मा की तहरीर पर कैराना सांसद इकरा हसन, पूर्व राज्य मंत्री मांगे राम कश्यप समेत कई लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस का आरोप है कि डीआईजी कार्यालय के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने से यातायात बाधित हुआ और जाम जैसे हालात बन गए थे.
एफआईआर दर्ज होने पर सपा सांसद इकरा हसन ने प्रशासन को कड़ा जवाब दिया है. इकरा ने कहा, "हम एफआईआर से बिल्कुल नहीं डरते. अगर प्रशासन को लगता है कि एक मुकदमा दर्ज करने से मैं अपने लोगों के साथ खड़ा होना छोड़ दूंगी या गरीबों की आवाज उठाना बंद कर दूंगी, तो वे कान खोलकर सुन लें— ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला. हम अपनी लड़ाई और मजबूती से लड़ेंगे."
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, 19 मई को सांसद इकरा हसन मोनू कश्यप हत्याकांड के मामले में पीड़ित परिवार को लेकर डीआईजी दफ्तर पहुंची थीं. वहां अधिकारियों के रवैये से नाराज होकर इकरा और उनके समर्थक धरने पर बैठ गए थे, जिसके बाद करीब 3 घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला. पुलिस ने इकरा हसन को हिरासत में लेकर महिला थाने पहुंचाया था और समर्थकों को जेल भेज दिया था, जिन्हें बाद में जमानत पर छोड़ा गया. अब पुलिस वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है, जबकि इकरा हसन का दावा है कि उनके पास भी पुलिस के दुर्व्यवहार के वीडियो सबूत हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में कश्यप समाज (नॉन-यादव ओबीसी) एक बेहद अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में मोनू कश्यप के परिवार के साथ खड़ीं इकरा हसन और अखिलेश यादव की यह मुलाकात इस क्षेत्र में एक बड़ा सियासी संदेश भी दे रही है.
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