'नमाजवादी तो...' अखिलेश के जेल भेजने वाले बयान पर रामभद्राचार्य का तीखा पलटवार, विवाद में आया नया मोड़

UP political controversy: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘जेल भेजने’ वाले बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कड़ा पलटवार किया है. बस्ती में आयोजित कथा के दौरान की गई उनकी नमाजवादी टिप्पणी के बाद विवाद और गहरा गया है. शंकराचार्य प्रकरण के बीच यह बयानबाजी उत्तर प्रदेश की राजनीति को नया सियासी मोड़ दे रही है. जानें पूरा मामला.

Rambhadracharya on Akhilesh Yadav statement
Rambhadracharya on Akhilesh Yadav statement

संतोष सिंह

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उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच चल रही वैचारिक जंग अब एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा रामभद्राचार्य को जेल भेज देने और उन पर धोखाधड़ी के पुराने मामले को लेकर किए गए हमले पर अब खुद जगद्गुरु ने मोर्चा खोल दिया है. बस्ती में कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने अखिलेश यादव को 'नमाजवादी' करार देते हुए उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.

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'नमाजवादी' कहकर रामभद्राचार्य ने साधा निशाना

अखिलेश यादव ने हाल ही में बयान दिया था कि रामभद्राचार्य पर उनकी सरकार के दौरान धोखाधड़ी (420) का मुकदमा था, जिसे वापस लेना उनकी बड़ी भूल थी और उन्हें जेल भेज देना चाहिए था. इस पर जब बस्ती में पत्रकारों ने जगद्गुरु से सवाल किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए तीखा तंज कसा. रामभद्राचार्य ने कहा, 'नहीं, नमाजवादी तो...'. उन्होंने अखिलेश यादव की पार्टी को 'नमाजवादी' कहकर संबोधित किया और उनके आरोपों को 'संभ्रम' यानी केवल एक भ्रम बताया. जगद्गुरु के इस पलटवार ने यह साफ कर दिया है कि वह अखिलेश यादव के हमलों से झुकने वाले नहीं हैं.

'संभ्रम है सब...' आरोपों पर जगद्गुरु की दो टूक

रामभद्राचार्य ने अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए जेल भेजने और मुकदमे वाले आरोपों पर विस्तार से बात करने के बजाय उन्हें केवल मानसिक भ्रम करार दिया. उनके समर्थकों का कहना है कि जिस मुकदमे की बात अखिलेश यादव कर रहे हैं, वह राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित था और जगद्गुरु का चरित्र और कार्य समाज के सामने स्पष्ट हैं. रामभद्राचार्य के इस छोटे लेकिन असरदार जवाब ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर अखिलेश यादव की राजनीति की दिशा पर सवाल उठा दिया है.

क्या है अखिलेश और रामभद्राचार्य के बीच की तल्खी?

अखिलेश यादव का गुस्सा दरअसल उस पॉक्सो एक्ट की एफआईआर को लेकर है जो उनके करीबी माने जाने वाले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज हुई है. यह एफआईआर रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर हुई है. अखिलेश का मानना है कि रामभद्राचार्य अपने शिष्य के जरिए शंकराचार्य को फंसा रहे हैं. इसी खींचतान में अखिलेश ने रामभद्राचार्य के चित्रकूट स्थित विश्वविद्यालय से जुड़े पुराने वित्तीय अनियमितता के मामले को फिर से उखाड़ दिया, जिसे उनकी सरकार ने 2012 में वापस लिया था.

अविमुक्तेश्वरानंद को पहले भी बता चुके हैं 'फर्जी'

रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह विवाद नया नहीं है. जगद्गुरु रामभद्राचार्य सार्वजनिक मंचों से कई बार अविमुक्तेश्वरानंद को 'फर्जी शंकराचार्य' कह चुके हैं. माघ मेले के दौरान भी दोनों के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी. अब जब मामला कोर्ट और पुलिस तक पहुंच गया है, तो अखिलेश यादव का रामभद्राचार्य पर हमला करना इस धार्मिक विवाद को पूरी तरह से 'समाजवादी बनाम भगवा' की राजनीतिक लड़ाई में बदल चुका है.

सियासी उबाल और पुलिस की कार्रवाई

रामभद्राचार्य के पलटवार के बाद अब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और जगद्गुरु के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर वार-पलटवार तेज हो गया है. एक तरफ जहां प्रयागराज पुलिस शंकराचार्य के मठ पहुंचकर जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ रामभद्राचार्य के 'नमाजवादी' वाले बयान ने विपक्षी खेमे को रक्षात्मक मोड पर ला दिया है. अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव इस धार्मिक पलटवार का जवाब किस तरह देते हैं.

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