उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने लगी है. हाल ही में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि यदि राज्य में उनकी सरकार बनती है तो महिलाओं को प्रतिवर्ष 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता (स्त्री सम्मान और समृद्धि योजना) दी जाएगी. इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में कार्यरत महिलाओं को हर महीने 2 दिन का आकस्मिक अवकाश और रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का वादा भी किया गया है.
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इन बड़ी चुनावी घोषणाओं का जनता पर क्या असर पड़ रहा है, यह जानने के लिए UP Tak की टीम ने इटावा के रामनगर फाटक पर जनता और महिलाओं से बातचीत की.
चुनावी फायदा या सिर्फ वादे? जनता की बंटी हुई राय
महिला सशक्तिकरण के लिहाज से सकारात्मक कदम
इटावा के स्थानीय निवासी अत्री पांडे का कहना है कि महिला सशक्तिकरण और इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस के नजरिए से यह एक अच्छी पहल है. इससे महिलाओं को आर्थिक संबल मिलेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावी वादे अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं और धरातल पर उतरना मुश्किल होता है.
"फ्रीबीज" की जगह रोजगार और शिक्षा पर ध्यान दे सरकार
कुछ युवाओं का रुख इस घोषणा को लेकर काफी सख्त नजर आया. स्थानीय युवा शिवम दीक्षित का मानना है कि केवल पैसे बांटना या फ्री बस यात्रा देना वास्तविक सशक्तिकरण नहीं है. उन्होंने कहा, "महिलाओं को फ्री की चीजें देने के बजाय उन्हें बेहतर शिक्षा और रोजगार (स्किल्स) दें, ताकि वे खुद आत्मनिर्भर बन सकें और अपना किराया खुद दे सकें." वहीं, नितिन पांडे ने इसे चुनाव से ठीक पहले जनता को लुभाने का जरिया बताया और कहा कि वोट विकास कार्यों और पुराने रिकॉर्ड को देखकर दिया जाना चाहिए, न कि मुफ्त की योजनाओं पर.
चुनावी झांसा या राहत?
बातचीत के दौरान महिलाओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. रेखा देवी का कहना था कि यदि सरकार बनने के बाद लाभ मिलता है तो फायदा जरूर होगा. वहीं, कमायनी नाम की महिला ने इसे सीधे तौर पर चुनावी झांसा करार दिया और कहा कि चुनाव के समय हर पार्टी ऐसे वादे करती है.
2027 के चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
इटावा की जनता की राय से साफ है कि जहां एक तरफ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इन योजनाओं से प्रभावित हो सकता है, वहीं शिक्षित वर्ग रोजगार, शिक्षा और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है. अखिलेश यादव और डिंपल यादव की यह घोषणा 2027 के चुनावी दंगल में कितना राजनीतिक लाभ दिला पाएगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा.
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