जाली नोट मामले में देवरिया कनेक्शन पर बवाल, BJP विधायक के साथ आरोपी की तस्वीर पर सपा ने साधा निशाना तो शलभ मणि ने दे दिया जवाब

देवरिया में अवैध नोटों के कारोबार के आरोपी विवेक यादव की विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद सपा और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. जहां सपा इसे विधायक का संरक्षण बता रही है, वहीं शलभ मणि ने आरोपी को सपा का कार्यकर्ता करार दिया है.

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव

रजत सिंह

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उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों देवरिया के बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. मामला प्रयागराज में पकड़े गए अवैध नोटों के कारोबार से जुड़ा है, जिसके तार देवरिया से जुड़ते नजर आ रहे हैं. इस विवाद में तस्वीरों और सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया है.

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क्या है पूरा विवाद?

हाल ही में प्रयागराज पुलिस ने अवैध नोटों के कारोबार के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इस मामले में देवरिया सदर विधानसभा के एक गांव का रहने वाला विवेक कुमार यादव मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया है, जो फिलहाल फरार है. समाजवादी पार्टी की आईटी सेल ने विवेक यादव के साथ विधायक शलभ मणि त्रिपाठी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं और उन पर अवैध कारोबार को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए.

शलभ मणि त्रिपाठी का पलटवार

इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि वह एक जन-प्रतिनिधि हैं और 'जनता दर्शन' में उनसे हर दल के लोग मिलने आते हैं. उन्होंने दावा किया कि आरोपी विवेक यादव असल में समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता है और वह सपा से जिला पंचायत का टिकट मांग रहा था. शलभ मणि ने विवेक का एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें वह खुद को 'सपाई' बता रहा है और कह रहा है कि पुलिस उसे राजनीतिक द्वेष के कारण फंसा रही है.

अखिलेश यादव के तीखे तेवर

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिना नाम लिए सरकार और स्थानीय विधायक पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "देवरिया और गोरखपुर की दूरी कितनी है, यह सबको पता है. भाजपा सरकार में नकली नोट देश में आ रहे हैं और असली नोट बाहर जा रहे हैं." अखिलेश ने आरोप लगाया कि प्रशासन विपक्षी कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाकर बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.

परिवार का क्या है कहना?

मामले में नया मोड़ तब आया जब विवेक यादव के चाचा जीत यादव सामने आए. उन्होंने स्वीकार किया कि उनका परिवार समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ है और उनके भाई (विवेक के पिता) ग्राम प्रधान हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक शलभ मणि त्रिपाठी केवल एक मूर्ति के उद्घाटन कार्यक्रम में गांव आए थे और विवेक के साथ उनकी तस्वीर महज एक औपचारिक मुलाकात का हिस्सा थी, उनका किसी अवैध कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है.

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या विवेक यादव वास्तव में सपाई है या भाजपाई? इस सियासी 'नूरा-कुश्ती' के बीच पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है.

 

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