कहते हैं कि प्यार सरहदें नहीं देखता, लेकिन सरहदें कानून जरूर देखती हैं. अगर बिना पासपोर्ट और वीजा के भावनाओं में बहकर कोई कदम उठाया जाए, तो प्यार का रास्ता सीधा जेल की सलाखों तक ले जाता है. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले एक लड़के की हकीकत है. सोशल मीडिया पर हुए प्यार के चक्कर में एक युवक बिना वीजा और बिना किसी कानूनी इजाजत के सीधे पाकिस्तान पहुंच गया. अब वहां अपनी सजा पूरी करने के बाद भी वह जेल की सलाखों के पीछे बंद है और उसका परिवार उसकी वतन वापसी के लिए भारत सरकार से गुहार लगा रहा है.
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फेसबुक पर दोस्ती और फिर प्यार की खातिर सरहद पार
यह पूरा मामला अलीगढ़ के बरला थाना इलाके के नगला खिटकारी गांव का है. यहां का रहने वाला बादल बाबू दिल्ली में सिलाई का काम करता था. कुछ साल पहले सोशल मीडिया के जरिए उसकी दोस्ती पाकिस्तान की रहने वाली सना नाम की एक लड़की से हुई. धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई. प्यार का खुमार बादल पर इस कदर चढ़ा कि उसने कानूनी दस्तावेजों (पासपोर्ट और वीजा) से ज्यादा अपने दिल की बात सुनी. वह 15 अक्टूबर 2024 को किसी तरह अवैध रूप से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गया.
एक गलती और खुल गई पोल
पाकिस्तान पहुंचने के बाद शुरुआत में तो सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा. लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब उसकी प्रेमिका सना ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. इसके बाद बादल वहीं रुक गया और आजीविका के लिए नौकरी करने लगा. एक दिन जब वह जंगल में बकरियां चरा रहा था, तो अचानक उसकी जुबान से एक क्षेत्रीय बोली का शब्द 'कछु ना हैरौ' निकल गया.
उसकी इस बोली को सुनकर वहां मौजूद स्थानीय लोगों को उस पर शक हो गया. लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. इसके बाद 27 दिसंबर 2024 को पाकिस्तानी पुलिस ने बादल बाबू को बिना वीजा देश में घुसने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया.
सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई में अटका पेंच
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की अदालत द्वारा दी गई बादल की सजा अब पूरी हो चुकी है. लेकिन सजा खत्म होने के बाद भी वह अब तक पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद है. बादल के परिवार का आरोप है कि भारत सरकार की तरफ से जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से उसकी रिहाई अटकी हुई है.
परिवार के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि लड़के की सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन भारतीय अधिकारियों की तरफ से रुचि न लेने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है. हालांकि, इस मामले में अलीगढ़ प्रशासन कई बार जरूरी दस्तावेज भेज चुका है और स्थानीय सांसद सतीश गौतम भी विदेश मंत्रालय को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन वतन वापसी की फाइलें अब भी दफ्तरों में ही घूम रही हैं.
बीमार है बादल, परिवार ने लगाई मोदी-योगी से गुहार
जेल में बंद बादल से जब परिवार की बात हुई थी, तो उसने बताया था कि वह अंदर बहुत परेशान है. उसे पेट, आंतों और किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिसके इलाज के लिए उसे मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया था. बेटे की बीमारी और उसकी हालत को देखकर परिवार की बेचैनी लगातार बढ़ रही है.
बादल के भाई ने बताया कि उसने दिल्ली जाकर कई नेताओं और अधिकारियों से मिलने की कोशिश की, लेकिन पैसों की कमी और सही जानकारी न होने की वजह से वह किसी से नहीं मिल पाया. बादल के पिता ने देश के शीर्ष नेतृत्व से अपील करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह इस देश के राजा हैं, वे हमारी मदद करें और हमारे बेटे को वापस लाएं.
धर्म परिवर्तन के दावे और वतन वापसी की आस
इस पूरी घटना का एक और पहलू भी सामने आया था, जब सोशल मीडिया पर बादल बाबू का एक वीडियो वायरल हुआ था. उस वीडियो में बादल यह कहता नजर आ रहा था कि वह अब वापस भारत नहीं आएगा और उसने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है.
हालांकि, आज उसका परिवार इन सब बातों को पीछे छोड़कर सिर्फ एक ही मांग कर रहा है कि बेटे से जो भी गलती हुई, वह हो गई, लेकिन अब उसे उसके वतन वापस लाया जाए. लंदन में रहने वाली भारतीय मूल की पूनम और पाकिस्तान के वकील फैज भी कानूनी तौर पर बादल की रिहाई और उसे भारत भेजने की कोशिशों में जुटे हैं. अब देखना होगा कि कागजों की यह रफ्तार कब तक कोट लखपत जेल के दरवाजे खोलती है और अलीगढ़ के इस परिवार का इंतजार खत्म होता है.
यहां देखें वीडियो
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