सोशल मीडिया पर 'लाइक्स' और 'फॉलोअर्स' बटोरने के लिए आजकल लोग समाज, परंपराओं और कानून की परवाह भी नहीं कर रहे हैं और बिना सोचे समझे कुछ भी रच डालने को तैयार हैं. उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने इंटरनेट की दुनिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हड़कंप मचा दिया था.
ADVERTISEMENT
दरअसल, अमरोहा के हसनपुर इलाके से बीते दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. वीडियो में दावा किया गया था कि तीन सगी बहनों ने एक ही युवक से एक साथ शादी रचा ली है. इस अनोखी और विवादित शादी का वीडियो जंगल में आग की तरह फैला और लोगों के बीच तीखी बहस छिड़ गई. लेकिन जब इस पूरे मामले में कानून का शिकंजा कसा, तो जो सच्चाई निकलकर सामने आई, उसने हर किसी को सिर पकड़ने पर मजबूर कर दिया.
सोशल मीडिया का प्रैंक निकला
जब मामला बढ़ा और स्थानीय बाल कल्याण समिति (CWC) ने इसका संज्ञान लिया, तो पूरी कहानी का ड्रामा ध्वस्त हो गया. समिति की सख्ती और तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद, वीडियो में दिख रही युवतियों को CWC के सामने पेश होना पड़ा. वहां पहुंचकर युवतियों ने अपनी गलती मानते हुए जो लिखित बयान दिया, उसने इस तथाकथित शादी की पूरी पोल खोल दी. युवतियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने किसी युवक से शादी नहीं की है. यह सब सिर्फ इंटरनेट पर रातों-रात मशहूर होने, सस्ती लोकप्रियता पाने और अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए रचा गया एक 'प्रैंक' (मजाक) था.
डर के मारे सच छिपाती रहीं लड़कियां
CWC के सामने पेश हुई देविका उर्फ सावित्री नाम की युवती ने अपने लिखित बयान में बताया कि उनकी योजना इस प्रैंक वीडियो को बनाने के बाद एक-दो दिनों में ही इसका सच सबको बताने की थी. लेकिन जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, मामले ने तूल पकड़ लिया. पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गया और स्थानीय हिंदू संगठनों ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताया.
युवती के मुताबिक, पुलिसिया कार्रवाई और सामाजिक दबाव के डर से वे बुरी तरह घबरा गईं. इसी डर की वजह से वे इस फर्जी प्रैंक को सच साबित करने का नाटक करती रहीं और सही समय पर सच उजागर नहीं कर सकीं. इतना ही नहीं, मामले की गहराई में जाने पर यह भी साफ हुआ कि वीडियो में दिखने वाली लड़कियां सगी बहनें नहीं, बल्कि आपस में मौसेरी बहनें हैं.
मंदिर के पुजारियों का इनकार और पालिका चेयरमैन का मोड़
वायरल वीडियो में बाकायदा हवन कुंड, अग्नि के फेरे और सिंदूर दान जैसी रस्में निभाते हुए दिखाया गया था. दावा किया गया था कि यह शादी इलाके के प्रसिद्ध चामुंडा मंदिर में हुई है. हालांकि, विवाद बढ़ते ही मंदिर के पुजारियों ने स्पष्ट कर दिया था कि उनके परिसर में ऐसी कोई भी गैर-कानूनी या अजीब शादी नहीं संपन्न कराई गई है.
मामला तब और पेचीदा हो गया था जब वीडियो में हसनपुर नगर पालिका चेयरमैन और कुछ अन्य महिलाएं भी नजर आईं. इससे विवाद ने और तूल पकड़ा. विरोध बढ़ता देख उस समय लड़कियों ने शादी के असली होने का झूठा दावा तक ठोक दिया था, ताकि वे अपनी बुनी हुई उलझन से बच सकें.
'सब कुछ फॉलोअर्स का खेल था'- CWC अध्यक्ष
अमरोहा की बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज ने इस पूरे घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए बताया कि ढौरिया गांव से जुड़े इस संवेदनशील मामले में स्थानीय पुलिस थाने और जिला प्रोबेशन कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी.
अध्यक्ष ने साफ किया कि युवतियों ने समिति के सामने अपना बयान दर्ज कराते हुए यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि असल जिंदगी में कोई विवाह नहीं हुआ है. यह पूरा बवंडर केवल डिजिटल दुनिया में व्यूज और फॉलोअर्स का ग्राफ बढ़ाने के लिए रचा गया एक सुनियोजित ड्रामा था.
सबक देता यह मामला
अमरोहा की यह घटना उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो चंद लाइक्स और फॉलोअर्स के चक्कर में कानून और सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रख देते हैं. एक फर्जी वीडियो से शुरू हुआ यह प्रैंक आखिरकार युवतियों के लिए कानून और जांच के दरवाजे तक पहुंचने की वजह बन गया.
ये भी पढ़ें: जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन पर स्टे के बाद मायावती का बड़ा बयान, जानिए सरकार को क्या दी नसीहत
ADVERTISEMENT


