Anurag Yadav IAS and CEC controversy: उत्तर प्रदेश के 2000 बैच के IAS ऑफिसर अनुराग यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं. उनका ताजा मामला पश्चिम बंगाल सामने आया है. दरअसल, चुनाव आयोग ने अनुराग को बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक यानी की ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी हुई थी. ऐसे में चुनाव की तैयारियों को लेकर बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक वर्चुअल रिव्यू मीटिंग ले रहे थे. सुत्रों के मुताबिक इसी में मीटिंग में अनुराग और CEC के बीच भिड़ंत हो गई.बताया जा रहा है कि मामला इतना बढ़ा कि महज 15 दिनों के भीतर IAS अनुराग यादव को पर्यवेक्षक पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. ऐसे में चलिए कौन है अनुराग यादव ? क्या है ये पूरा मामला? क्या और अनुराग का विवादों से पूराना नाता? विस्तार से जनिए इस खबर में....
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सबसे पहले जानिए क्या है मामला?
दरअसल, बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक हाई लेवल वर्चुअल मीटिंग ले रहे थे. इसमें बारी-बारी से सभी जिलों के पर्यवेक्षकों से पोलिंग बूथों का ब्योरा मांगा जा रहा था. इस बीच जब बारी कूच बिहार के ऑब्जर्वर अनुराग यादव की बारी आई. लेकिन इस दौरान उन्हें आंकड़े बताने में कुछ पलों की देरी हो गई. सूत्रों के मुताबिक, इसी देरी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक टिप्पणी कर दी. यही बात अनुराग यादव को चुभ गई. इसी पर अनुराग ने CEC को जवाब दे दिया.
IAS अनुराग यादव ने CEC से ऐसा क्या कहा?
दावा है कि IAS अनुराग यादव ने मीटिंग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कहा कि आप मुझसे इस तरह से बात नहीं कर सकते. जानकारी के मुताबिक इस दाैरान अनुराग ने ये भी कहा कि मैंने भी इस सेवा में 25 साल गुजारे हैं. आप हमसे इस तरह से बात नहीं कर सकते. अनुराग यादव के इस जवाब के बाद मीटिंग में सन्नाटा पसर गया. इससे मीटिंग में माहौल तनावपूर्ण हो गया. इसके बाद मीटिंग में दूसरे टाॅपिक्स में डिस्कशन होने लगा और किसी तरह बैठक को निपटाया गया. इस बीच अब जानकारी मिली है कि अनुराग यादव को पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया गया है.
क्या है 25 हजार करोड़ का MoU विवाद?
आपको बता दें कि अनुराग यादव पिछले कुछ दिनों से लगातार विवादों में बने हुए हैं. करीब 10 दिन पहले ही उन्हें IT और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटाया गया था. उन पर आरोप लगा था कि उनके विभाग ने AI PUCH नाम की एक ऐसी कंपनी के साथ 25,000 करोड़ रुपये का एमओयू (MoU) साइन कर दिया जो सिर्फ कागजों पर चल रही थी. इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को जमकर घेरा. इसके बाद 30 मार्च को उन्हें समाज कल्याण विभाग में भेज दिया गया.
कौन हैं अनुराग यादव?
आजमगढ़ के रहने वाले अनुराग यादव 2002 बैच के IAS अधिकारी हैं. व्यावहारिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें पहली तैनाती जौनपुर जिले में मिली. यहां वे मार्च 2005 से मई 2007 तक डीएम रहे. इसके बाद वे ग्रामीण विकास विभाग में अवर सचिव के पद पर रहे. मार्च 2012 से फरवरी 2014 तक उन्होंने लखनऊ के डीएम के रूप में कार्य किया, जबकि अगस्त 2014 से फरवरी 2016 तक वे झांसी के डीएम रहे.
योगी सरकार में भी मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
योगी आदित्यनाथ सरकार में भी अनुराग यादव को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं. उन्हें वित्त सचिव, शहरी विकास विभाग, स्टेट मिशन डायरेक्टर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कृषि विभाग में सचिव के पद पर तैनात किया गया. जनवरी 2025 में उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया, जहां वे मार्च 2026 तक कार्यरत रहे. हाल ही में, करीब 10 दिन पहले ही उन्हें समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है.
क्या होती है पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी?
चुनाव के दौरान नियुक्त पर्यवेक्षक (Observers) भारत निर्वाचन आयोग की आंख और कान होते हैं. इनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हों. नामांकन से लेकर मतदान और वोटों की गिनती तक ये अधिकारी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं. आचार संहिता का उल्लंघन होने पर ये सीधे आयोग को रिपोर्ट करते हैं.
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