उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर यादव परिवार की अंदरूनी कलह और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता सड़क पर आ गई है. बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने देर रात लखनऊ में विधानसभा के सामने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान अपर्णा यादव ने न केवल सपा का झंडा जलाया, बल्कि झंडे पर मौजूद अपने जेठ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीर को भी आग के हवाले कर दिया.
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क्यों भड़का अपर्णा यादव का गुस्सा?
यह पूरा विवाद लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के गिरने के बाद शुरू हुआ. शुक्रवार को संसद में दो दिन की बहस के बाद हुई वोटिंग में यह बिल पास नहीं हो सका. पिछले 12 सालों में यह पहली बार था जब मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में गिरा हो. बिल के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े.
"द्रौपदी के चीरहरण जैसा कृत्य"
विपक्ष द्वारा बिल का विरोध किए जाने पर अपर्णा यादव बेहद आक्रामक नजर आईं. उन्होंने विपक्षी दलों की तुलना 'दुर्योधन' और 'दुशासन' से करते हुए कहा, "आज भारतीय सभ्यता का पुनः चीरहरण हुआ है, जैसे महाभारत काल में द्रौपदी का हुआ था. महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके इन दुष्ट पार्टियों ने स्त्री की अस्मिता को तार-तार कर दिया है."
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों को दोहराते हुए कहा, "अंधेरी रात है, सूरज उगेगा और फिर से कमल खिलेगा. इन विधर्मियों का झंडा जलेगा और इनकी पार्टियां खत्म होंगी."
राजनीतिक मुद्दा या पारिवारिक विवाद?
मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव का अखिलेश यादव की तस्वीर जलाना कई सवाल खड़े कर रहा है. प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा और अखिलेश के रिश्तों में खटास पुरानी है. जनवरी 2026 में प्रतीक यादव के सोशल मीडिया अकाउंट से अपर्णा को लेकर कई विवादित बातें सामने आई थीं. अब सड़क पर अखिलेश की फोटो जलाना इस बात का संकेत है कि परिवार और राजनीति के बीच की खाई और गहरी हो गई है.
सपा का रुख
समाजवादी पार्टी ने इसे बीजेपी का 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया है. वहीं अपर्णा यादव का कहना है कि अगर वह आज चुप रह जातीं, तो उनकी आत्मा उन्हें कभी माफ नहीं करती क्योंकि यह लड़ाई महिलाओं के अधिकारों की है.
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