अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावे पर अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या है पूरा विवाद?

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की करोड़ों की राशि गायब होने के अखिलेश यादव के आरोप के बाद मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्टीकरण जारी किया है.

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव

संतोष शर्मा

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अयोध्या का भव्य राम मंदिर इन दिनों धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. अखिलेश यादव के आरोपों के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सामने आकर स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

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अखिलेश यादव का आरोप

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए राम मंदिर ट्रस्ट पर निशाना साधते हुए इसे "विश्व के राम भक्तों के लिए बेहद संवेदनशील समाचार" करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों की रकम गायब पाई गई है और इस पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है. अखिलेश ने मांग की कि इस मामले में न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि यह सनातनी समाज की आस्था से जुड़ा विषय है.

इतना ही नहीं, चंपत राय के स्पष्टीकरण के बाद अखिलेश ने एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की सफाई "संदिग्ध" है और आंकड़ों के मिलान के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया जाना चाहिए. उन्होंने सभी ट्रस्टियों को एक साथ बैठकर जवाब देने की चुनौती भी दी.

चंपत राय की सफाई

इन गंभीर आरोपों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता रहता है. चंपत राय के मुताबिक, हुंडी (दानपात्र) काउंटिंग रूम का ऑडिट ट्रस्ट के न्यासी, कार्यकर्ता और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारी मिलकर करते हैं. उन्होंने साफ किया कि अभी तक किसी भी प्रकार की उल्लेखनीय अनियमितता या कमी ध्यान में नहीं आई है और दान की गणना की प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है.

पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे ने दागे सवाल

इस विवाद में अयोध्या के पूर्व विधायक और सपा नेता तेज नारायण पांडे (पवन पांडे) भी कूद पड़े हैं. उन्होंने इसे 'चोरी नहीं, बल्कि डकैती' करार देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के सदस्यों के बीच आपस में विवाद और गाली-गलौज की खबरें भी सामने आ रही हैं. पांडे ने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए.

फिलहाल, राम मंदिर की दान निधि को लेकर छिड़ी यह सियासी जंग शांत होती नहीं दिख रही है. एक तरफ विपक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रस्ट इन सभी आरोपों को निराधार बता रहा है.

 

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