ADVERTISEMENT
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए गए दान में कथित हेराफेरी की एक के बाद एक परतें खुलती जा रही है. इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश तब हुआ, जब मंदिर प्रशासन ने लगातार घट रही दान राशि को देखते हुए सीक्रेट तरीके से हिडन कैमरे लगवाए. जांच एजेंसियों के मुताबिक, दानपेटी से लेकर बैंक में पैसे जमा होने तक की पूरी चेन में बेहद शातिराना तरीके से गबन किया जा रहा था.
ऐसे हुआ चोरी का शक
मामले की शुरुआत मई के आखिरी हफ्ते में हुई. राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जब बैंक में जमा होने वाले दैनिक पैसों के रिकॉर्ड और दानपेटियों के खाली होने के ट्रेंड का बारीकी से अध्ययन किया, तो उन्हें कुछ गड़बड़ी नजर आई.
आमतौर पर मंदिर की जिस एक दान पेटी से एक बार में 7 से 8 लाख रुपये निकलते थे, वहां पिछले कुछ हफ्तों से अचानक 500 रुपये के नोटों की गड्डियां कम होने लगी थीं. शक गहराने पर ट्रस्ट ने नोट गिनने वाले विशेष कमरे में कुछ हिडन कैमरे इंस्टॉल करवा दिए.
सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान, 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 तक के CCTV फुटेज की बारीकी से जांच की गई. इस दौरान जांच टीम को CCTV फुटेज में कुल 70 बार कथित चोरी या गबन से जुड़ी गतिविधियां सामने आई हैं.
नोट चोरी करने के 2 शातिर तरीके!
जब हिडन कैमरों की एक हफ्ते की फुटेज को खंगाला गया तो अधिकारी दंग रह गए. नोट गिनने के काम में तैनात कुछ कर्मचारी वहां लगे मुख्य CCTV कैमरे के ठीक सामने जानबूझकर खड़े हो जाते थे, ताकि उनकी हरकतें रिकॉर्ड न हों. इसी बीच उनके साथी नोटों की गड्डियों से पैसे निकालकर अपने कपड़ों में छुपा लेते थे.
चोरी का दूसरा तरीका और भी ज्यादा शातिराना था. कर्मचारी नोट गिनते समय हर गड्डी में कुछ एक्स्ट्रा नोट डाल देते थे. बैंक के नियम के मुताबिक, वहां सीधे गड्डियां गिनी जाती थीं और एक-एक नोट का मिलान नहीं होता था, जिसके आधार पर वाउचर बन जाता था. इसके बाद जब पैसे मंदिर से बैंक ले जाए जाते थे तो रास्ते में या कहीं बीच में गड्डी से वे एक्स्ट्रा नोट निकाल लिए जाते थे. इस तरह कागजों पर वाउचर का मिलान भी सही रहता था और लाखों रुपये की चोरी भी हो जाती थी.
सिफारिश पर रखे गए थे ज्यादातर लोग
जांच में यह भी बात सामने आई है कि नोटों की गिनती में लगे ज्यादातर लोग किसी न किसी की सिफारिश पर रखे गए थे. उदाहरण के लिए, ट्रस्ट के व्यवस्थापक और चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को इस काम में लगवाया था. वहीं, वाउचर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा अनुकल्प मिश्रा काफी समय से काम कर रहा था, जिसने अपने बहनोई लव कुश मिश्रा की एंट्री कराई थी. मामला खुलने के बाद पुलिस ने लव कुश के घर पर छापेमारी कर करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं.
इसके अलावा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र नाम के दो व्यक्ति लगातार उस कमरे में आते-जाते रहते थे, जहां दानपेटियां खोली जाती थीं.
श्रद्धालुओं के जेवरात भी गायब
आरोपियों ने रामलला के लिए भक्तगणों को जो सोने-चांदी के आभूषण दान किए उनको भी नहीं छोड़ा. बाल रूप रामलला के कंगन, पैजनिया, नथ, झुमकी और बाली जैसे कीमती जेवरात रजिस्टर में होने से पहले ही इन्हें गायब कर दिया जाता था.
पकड़े गए एक अन्य आरोपी अविनाश पांडे के बैंक खातों की जांच से पता चला है कि वह चोरी की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा सीधे अपने पर्सनल अकाउंट में जमा करा रहा था. ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जब बैंक ट्रांजैक्शन की तारीखों और चोरी के दिनों का मिलान किया, तो इस बात की पूरी तरह पुष्टि हो गई.
तलाशी न लेना बनी सबसे बड़ी लापरवाही
इस पूरे मामले में सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. ड्यूटी खत्म होने के बाद कमरे से बाहर निकलने वाले किसी भी कर्मचारी की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी. इसी बड़ी लापरवाही का फायदा उठाकर कर्मचारी बेखौफ होकर नोट और जेवरात अपने कपड़ों में छुपाकर बाहर ले जाने लगे. फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि इस रैकेट में शामिल अन्य कड़ियों का पता लगाया जा सके.
ADVERTISEMENT


