मां को ब्रेन हैमरेज, पिता को कैंसर…बेटे ने 200KM का सफर किया, 9 घंटे बाद मिला LPG सिलेंडर! बाराबंकी के अरुण की दर्दनाक कहानी!!

बाराबंकी में गैस सिलेंडर की कमी और सप्लाई में देरी से एक मजदूर को 200 किलोमीटर दूर से आकर 9 घंटे लाइन में लगना पड़ा. बीमार माता-पिता के लिए खाना बनाने की मजबूरी में उसने नौकरी से छुट्टी ली.

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सैयद रेहान मुस्तफा

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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सिस्टम के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को साफ बयां करती है. यहां एक मजबूर बेटे को अपने बीमार माता-पिता का चूल्हा जलाने के लिए 200 किलोमीटर दूर से छुट्टी लेकर आना पड़ा और फिर सिलेंडर पाने के लिए कड़ाके की ठंड या मुश्किल हालातों के बीच रात 3 बजे से लाइन में लगना पड़ा.

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क्या है पूरा मामला?

यह कहानी शाहजहांपुर में माली का काम करने वाले अरुण कुमार की है. अरुण मूल रूप से बाराबंकी के टिंडोला बरेठी गांव के निवासी हैं. उनके घर में बूढ़े और गंभीर रूप से बीमार माता-पिता हैं. माँ को ब्रेन हैमरेज हुआ है और पिता कैंसर से जूझ रहे हैं. घर की रसोई में गैस खत्म होने के कारण खाना बनना बंद हो गया था, जिसके बाद अरुण को नौकरी से छुट्टी लेकर भागना पड़ा.

9 घंटे का लंबा इंतजार

अरुण ने बताया कि उन्होंने कई दिन पहले सिलेंडर बुक किया था, लेकिन जब होम डिलीवरी नहीं हुई, तो वे खुद शाहजहांपुर से बाराबंकी पहुंचे. बुधवार तड़के 3 बजे ही वे 8 किलोमीटर पैदल चलकर गैस एजेंसी पहुंच गए. एजेंसी सुबह 10 बजे खुली, लेकिन अरुण को सिलेंडर दोपहर 12 बजे मिल सका. यानी एक सिलेंडर के लिए उन्हें करीब 9 घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा.

प्रशासन की सफाई

मामला चर्चा में आने के बाद जिला पूर्ति अधिकारी राकेश तिवारी ने संज्ञान लिया. उन्होंने बताया कि उपभोक्ता को सिलेंडर उपलब्ध करा दिया गया है और भविष्य में समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. 

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