UP Election 2027: बिजनौर सीट पर सिर्फ 1445 वोटों का फेर! BJP, RLD और SP की क्यों बढ़ी टेंशन? जानिए पूरा सियासी समीकरण

सुषमा पांडेय

• 11:52 AM • 03 Oct 2026

बिजनौर विधानसभा सीट पर मुस्लिम और जाट वोट बैंक के अलावा OBC और सवर्ण जातियों (सैनी, राजपूत, कश्यप, ब्राह्मण, पाल आदि) का बड़ा और बिखरा हुआ आधार मौजूद है. पिछले चुनावों में जीत-हार का मार्जिन बेहद कम रहने के कारण 2027 में जिस दल के पक्ष में ये वर्ग लामबंद होंगे, उसी की जीत तय होगी.

अखिलेश यादव- योगी आदित्यनाथ
अखिलेश यादव- योगी आदित्यनाथ
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही बिजनौर जिले की सदर विधानसभा सीट पर सियासी हलचल तेज हो गई है. बिजनौर सीट उत्तर प्रदेश की उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां हार-जीत का अंतर बेहद कम रहा है और हर चुनाव में मुकाबला आखिरी राउंड तक सांसें थमा देने वाला साबित होता है. 

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2022 और 2024 के आंकड़े दे रहे हैं बड़ी चेतावनी

पिछले दो चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीट पर किसी भी दल की राह आसान नहीं दिखती:

  • 2022 विधानसभा चुनाव: बीजेपी उम्मीदवार सुची मौसम चौधरी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उनकी जीत का अंतर महज 1,445 वोट था. उन्हें 97,165 वोट मिले थे, जबकि सपा-आरएलडी गठबंधन के प्रत्याशी नीरज चौधरी को 95,720 वोट मिले. वहीं बीएसपी की उम्मीदवार रुचि वीरा को 52,000 से अधिक वोट मिले थे. 
  • 2024 लोकसभा चुनाव (विधानसभा वार बढ़त): 2024 के आम चुनाव में तस्वीर बदली. बिजनौर विधानसभा क्षेत्र के अंदर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी दीपक सैनी ने बीजेपी-आरएलडी गठबंधन उम्मीदवार चंदन चौहान के मुकाबले 991 वोटों की बढ़त बना ली थी. 

दो चुनावों के ये करीबी आंकड़े बताते हैं कि इस सीट पर कुछ हजार वोटों का हेयर-फेर भी नतीजे पलट सकता है, 

बिजनौर सीट का जातीय गणित

बिजनौर विधानसभा क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों की मिश्रित आबादी है. यहां का जातीय समीकरण काफी दिलचस्प है:

  • मुस्लिम मतदाता: लगभग 1 लाख (सबसे बड़ा वोट बैंक)
  • जाट मतदाता: लगभग 70,000
  • अनुसूचित जाति (SC): लगभग 50,000
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) व अन्य: सैनी (25,000), राजपूत (22,000), कश्यप (12,000), ब्राह्मण (10,000), पाल (10,000), नाई (7,000), प्रजापति (6,000) तथा वैश्य, गुर्जर और पंजाबी मतदाता.

2027 में क्या होंगे टर्निंग पॉइंट्स?

जयंत चौधरी का पाला बदलना: 2022 के विधानसभा चुनाव में जयंत चौधरी की आरएलडी (RLD) सपा के साथ गठबंधन में थी, लेकिन 2027 के चुनाव में आरएलडी बीजेपी गठबंधन (NDA) का हिस्सा है. ऐसे में जाट मतदाताओं का रुख किस ओर रहेगा, यह बड़ा फैक्टर होगा. 

स्थानीय मुद्दे और गन्ने का भुगतान: स्थानीय पत्रकारों के अनुसार बिजनौर एक किसान बहुल क्षेत्र है [05:47]। गन्ने का समर्थन मूल्य और समय पर भुगतान चुनाव का बड़ा मुद्दा बनता रहा है. 

उम्मीदवार का चयन: विश्लेषकों का मानना है कि इस नजदीकी मुकाबले वाली सीट पर जीत या हार काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टियाX किस प्रत्याशी को मैदान में उतारती हैं.

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