दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ 35 दिनों तक चला युवाओं का आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार की जवाबदेही की मांग को लेकर माहौल गरमाया रहा. इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता की बेटी के बयान ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
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उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सदर सीट से बीजेपी के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक छाई हुई हैं. पेशे से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार यशस्विनी ने जंतर-मंतर पर हुए 'जेन-जी' (Gen-Z) प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया है. इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के काम की जमकर सराहना की है.
लंदन से पढ़ाई, अंतरराष्ट्रीय अनुभव
यशस्विनी राजे सिंह की अपनी एक अलग शैक्षणिक और पेशेवर पहचान है. उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से इंटरनेशनल रिलेशंस में स्नातक (BA) और प्रतिष्ठित 'लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस' (LSE) से डेवलपमेंट स्टडीज में स्नातकोत्तर (MSc) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा वे यूनिसेफ इंडिया, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव और लंदन के विभिन्न सरकारी विभागों में बतौर सलाहकार व इंटर्न काम कर चुकी हैं.
'राजनीति से परे नहीं, यह पूरी तरह से राजनीतिक मामला'
यशस्विनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर उन हस्तियों और इन्फ्लुएंसर्स पर निशाना साधा, जो इस मुद्दे को 'गैर-राजनीतिक' बता रहे थे. उन्होंने कहा कि जब बात देश के लाखों छात्रों के भविष्य की है, तो इसे राजनीति से अलग नहीं देखा जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थागत विफलताओं को छिपाने के लिए अक्सर जवाबदेही से किनारा कर लिया जाता है, जबकि यह सीधे तौर पर सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और CJP की भूमिका पर उठाये सवाल
अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में यशस्विनी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भाषा पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि त्यागपत्र के लहजे में किसी तरह का खेद या पछतावा नजर नहीं आता, बल्कि ऐसा लगता है जैसे जवाबदेही लेने के बजाय शहादत दी गई हो.
वहीं CJP की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इस संगठन ने सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम के सही इस्तेमाल से उन युवाओं को जोड़ा जो आमतौर पर राजनीतिक बहसों से दूर रहते थे. नए दौर के मीम्स, मैसेजिंग और डिजिटल कंटेंट के जरिए विरोध को आम लोगों तक पहुंचाने में CJP का प्रयास सराहनीय रहा.
पिता की विचारधारा से अलग, खुद की पहचान
एक तरफ उनके पिता बीजेपी के नेता हैं और हिंदुत्व समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राजनीतिक राय रखते रहे हैं. दूसरी ओर यशस्विनी ने सार्वजनिक रूप से कई मामलों में अलग विचार व्यक्त किए हैं. यही वजह है कि उनके बयान लगातार चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं. फिलहाल NEET आंदोलन और सरकार की जवाबदेही को लेकर दिए गए उनके बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो रहे हैं.
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