UP BJP में बड़ा बदलाव, नई टीम के पीछे क्या है 2027 का चुनावी गणित?

पीयूष मिश्रा

09 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 9 2026 11:52 AM)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए नई टीम बनाई है. पंकज चौधरी के नेतृत्व में संगठन को मजबूत करने की कोशिश है. बीजेपी बूथ, सामाजिक समीकरण और मीडिया रणनीति पर भी फोकस कर रही है.

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. पार्टी ने संगठन में कई अहम बदलाव किए हैं. शनिवार को क्षेत्रीय प्रभारियों और मोर्चा प्रभारियों की नई टीम का ऐलान किया गया है. नई टीम में अलग-अलग इलाकों और समाज के कई वर्गों को जगह दी गई है. पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ सामाजिक समीकरण भी साधना चाहती है.

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योगी की दिल्ली में लगातार बैठकें

बीजेपी में संगठन में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली में पार्टी के बड़े नेताओं से लगातार मुलाकात कर रहे हैं. कुछ दिन पहले सीएम योगी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अकेले में बैठक हुई थी. इसके बाद शनिवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की. बताया गया कि बैठक में यूपी सरकार के काम, संगठन की स्थिति और बूथ स्तर की तैयारी पर बात हुई. 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई.

पंकज चौधरी के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी टीम

बीजेपी ने पंकज चौधरी को यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. अब नई टीम उनके नेतृत्व में काम करेगी. पंकज चौधरी महाराजगंज से आते हैं. वह सात बार सांसद रह चुके हैं. केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनकी गिनती पार्टी के अनुभवी नेताओं में होती है. उनकी छवि शांत और सरल नेता की है. माना जा रहा है कि वह संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने में कुर्मी समाज का समीकरण भी अहम माना जा रहा है. बीजेपी पहले से अपना दल (एस) के साथ गठबंधन में है. इसके बावजूद पार्टी अपना कुर्मी नेतृत्व भी मजबूत रखना चाहती है.

धर्मपाल सिंह: संघ पृष्ठभूमि वाला संगठन-केंद्रित चेहरा

भाजपा पहले ही धर्मपाल सिंह को उत्तर प्रदेश में संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप चुकी है. वे लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं. अगस्त 2022 में सुनील बंसल के राष्ट्रीय स्तर पर जाने के बाद धर्मपाल सिंह को यूपी भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया था. पार्टी उन्हें लो-प्रोफाइल, अनुभवी और संगठन-केंद्रित कार्यकर्ता के रूप में देखती है. उन्हें अपेक्षाकृत गुटबाजी से दूर और तटस्थ तरीके से संगठन चलाने वाला चेहरा माना जाता है.

गीता शाक्य को ब्रज की जिम्मेदारी

भाजपा ने गीता शाक्य को ब्रज क्षेत्र का प्रभारी बनाया है. वे मौर्य-शाक्य-सैनी समुदाय से आती हैं, जिसे उत्तर प्रदेश की प्रभावशाली गैर-यादव ओबीसी जातियों में गिना जाता है.

ब्रज क्षेत्र में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कासगंज, हाथरस और अलीगढ़ जैसे जिले शामिल हैं, जहां शाक्य, मौर्य, कुशवाहा और सैनी समुदायों की अच्छी उपस्थिति है. भाजपा 2027 से पहले इन वर्गों को और मजबूती से अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.

पश्चिमी यूपी में राम प्रताप सिंह चौहान

राम प्रताप सिंह चौहान को पश्चिम क्षेत्र का प्रदेश महामंत्री बनाया गया है. वे आगरा क्षेत्र से आते हैं और उन्हें ब्रज तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संगठनात्मक राजनीति के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु माना जाता है

पश्चिमी यूपी में जाटों के साथ ठाकुर समाज भी कई सीटों पर असर रखता है. ऐसे में उनकी नियुक्ति को सामाजिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है.

शंकर लोधी के जरिए OBC पर फोकस

बीजेपी ने शंकर लोधी को भी अहम जिम्मेदारी दी है. लोधी समाज का असर कानपुर-बुंदेलखंड के कई इलाकों में है. हमीरपुर, महोबा, बांदा, झांसी, जालौन, फतेहपुर और उन्नाव जैसे जिलों में भी इस समाज की मौजूदगी है.

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी गैर-यादव पिछड़े समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. शंकर लोधी की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

गोरखपुर से अभिजात मिश्रा को जिम्मेदारी

बीजेपी ने अभिजात मिश्रा को प्रदेश महामंत्री बनाया है. वह गोरखपुर क्षेत्र से आते हैं. उन्हें पार्टी के ब्राह्मण चेहरे के तौर पर भी देखा जा रहा है. गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र है.

ऐसे में गोरखपुर से किसी नेता को प्रदेश संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देना अहम माना जा रहा है. अभिजात मिश्रा लंबे समय से संगठन और छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं.

काशी में रमेश सिंह को कमान

रमेश सिंह को काशी क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है. काशी बीजेपी के लिए सबसे अहम क्षेत्रों में से एक है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी आता है. इसलिए पार्टी के लिए यह क्षेत्र खास महत्व रखता है. रमेश सिंह पहले से प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष हैं. उन्हें संगठन का अच्छा अनुभव है.

अवध की जिम्मेदारी दिलीप पटेल को

दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र की जिम्मेदारी मिली है. अवध में बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें हैं.यहां शहर और गांव दोनों का असर चुनाव में दिखाई देता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कुछ इलाकों में नुकसान हुआ था. ऐसे में पार्टी इन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत करना चाहती है. दिलीप पटेल को कार्यकर्ताओं के बीच काम करने और चुनावी तैयारी का अनुभव है.

मीडिया पर भी बीजेपी का खास फोकस

बीजेपी ने यतेंद्र शर्मा को यूपी का प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया है. यतेंद्र शर्मा का जुड़ाव विद्यार्थी परिषद और संघ से रहा है. उन्होंने करीब दो दशक तक राजनीतिक पत्रकारिता भी की है. उन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया का अच्छा अनुभव है. वह बीजेपी, आरएसएस, केंद्र सरकार और चुनावी राजनीति को करीब से कवर कर चुके हैं.

उनकी नियुक्ति से यह भी संकेत मिलता है कि बीजेपी 2027 में मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी बात मजबूती से रखने की तैयारी कर रही है.

2027 के लिए संगठन मजबूत करने की कोशिश

बीजेपी की नई टीम में कई समाजों और इलाकों को जगह मिली है. इसमें कुर्मी, लोधी, मौर्य-शाक्य, ब्राह्मण और ठाकुर जैसे वर्ग शामिल हैं. पार्टी का फोकस सिर्फ नेताओं की नियुक्ति तक सीमित नहीं है. बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करना भी उसकी बड़ी प्राथमिकता है.

इसके साथ ही पार्टी सरकार के काम, सामाजिक समीकरण और मीडिया के जरिए अपनी चुनावी जमीन मजबूत करना चाहती है.

यूपी में 2027 का चुनाव अभी दूर है. लेकिन बीजेपी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. नई टीम के जरिए पार्टी अब संगठन को जमीन पर कितना मजबूत कर पाती है, इसका असर आने वाले महीनों में साफ दिखाई देगा.