राजनीति हो, कॉरपोरेट वर्ल्ड हो या ग्लैमर-एक्टिंग की दुनिया, कुछ लोग अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, तो कुछ को विरासत में बड़ा नाम मिलता है. परिमल नाथवानी आज देश का बड़ा कॉरपोरेट नाम है जिन्होंने राजनीति में भी खुद को जमा लिया. जब उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट आई तो सब धनराज परिमल नाथवानी का नाम देखकर हैरान रह गए. ये अखिलेश यादव का राजनीतिक धमाका बना जिसे लोग सरप्राइज कैंडिडेट भी कह रहे हैं. धनराज नाथवानी, अब तक ये नाम उतना चर्चित नहीं रहा लेकिन आज चर्चित चेहरा बना है. जब प्रोफाइल खंगाली तो सामने आया कि धनराज पिता परिमल नाथवानी की ही कॉर्बन कॉपी है. फर्क ये कि परिमल नाथवानी ने कभी साबुन की टिकिया बेची थी लेकिन धनराज को रिलायंस में पोजिशन, गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन में पोस्टिंग और अब राजनीति सब कुछ सिल्वर स्पून के साथ विरासत से मिलता गया. खुशकिस्मत ही तो हैं देश की राजनीति के नए चर्चित चेहरा धनराज नाथवानी. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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सोशल मीडिया पर हो रही खूब चर्चा
जब से धनराज नाथवानी वाला सरप्राइज अखिलेश यादव ने अनाउंस किया, सोशल मीडिया पर जबरदस्त घमासान मचा है. सोशल मीडिया पर लोग हैरान हैं कि जो समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में PDA पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक का नारा बुलंद कर रही थी, उसने अचानक गुजरात के एक बड़े कॉर्पोरेट चेहरे और अंबानी परिवार के करीबी को यूपी से टिकट क्यों दे दिया? नेटिजन्स चुटकी ले रहे हैं कि पिता परिमल नाथवानी झारखंड से एनडीए के समर्थन से चौथी बार राज्यसभा पहुंचे हैं और बेटा अब सपा के पाले से संसद जा रहा है, यानी दोनों सदनों में नाथवानी परिवार का जलवा रहने वाला है. जिसका फायदा मुकेश अंबानी और रिलायंस को जाएगा.
जीरो से हीरो बने थे धनराज के पिता परिमल नाथवानी!
धनराज की कहानी शुरू हुई परिमल नाथवानी की जादुई लाइफ जर्नी से. 1956 में मुंबई में जन्मे परिमल नाथवानी ने अपनी लाइफ में खूब स्ट्रगल किया. परिमल नाथवानी की शादी 1984 में तब हो गई थी जब वो कुछ बने नहीं थे. कुछ बनने के लिए तरह-तरह के बिजनेस के प्रयोग कर रहे थे. जब फाइनेंशियली स्टेबल भी नहीं थी तब वर्षा से शादी हुई. स्ट्रगल के दौर में ही 1986 में पहले बच्चे का जन्म हुआ और नाम रखा धनराज. आगे और एक बेटे करन का भी जन्म हुआ. उस दौर में परिमल और वर्षा घर चलाने और बच्चों को छोटी-छोटी खुशियां देने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे थे लेकिन किस्मत जैसे रूठी हुई थी. कुछ काम नहीं आ रहा था. मुंबई में पहले कोल्ड ड्रिंक्स और फिर साबुन की छोटी फैक्ट्री लगाई. वडोदरा में करीब 40 पीसीओ बूथ भी चलाए. शेयर बाजार में किस्मत आजमाई तो भारी नुकसान हुआ.
अच्छे दिन तब आए जब अचानक रिलायंस के फाउंडर धीरू भाई अंबानी से मिले. उस एक मुलाकात ने जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. धीरूभाई ने यंग परिमल में कुछ तो देखा कि जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के लिए करीब 10,000 एकड़ भूमि अधिग्रहण की बेहद मुश्किल जिम्मेदारी सौंप दी. परिमल ने मुश्किल टास्क पूरा कर लिया और हमेशा के लिए अंबानी परिवार के सबसे भरोसेमंद राइट हैंड बन गए. जब 1995 के बाद रिलायंस के साथ परिमल की किस्मत बदली, तो उन्होंने अपने बेटों को दुनिया की हर वो खुशी और ऐश-ओ-आराम दिया, जिसके लिए उन्होंने खुद अपनी जवानी में कभी दर-दर की ठोकरें खाई थीं.
धनराज से अंबानी परिवार का रिश्ता!
धनराज के बचपन में भी संघर्ष था लेकिन जवानी तक परिवार में सब चीजें ठीक होती गईं. धनराज ने मौके का फायदा उठाया. लंदन के रीजेंट बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई की. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से कॉर्पोरेट लॉ और पब्लिक रिलेशंस में स्पेशलाइजेशन के साथ एमबीए की डिग्री हासिल की. धनराज नाथवानी के लिए रिलायंस एम्पायर के दरवाजे क्वालिफिकेशन और पिता परिमल नाथवानी के कारण खुले थे. उन्होंने साल 2009 में रिलायंस इंडस्ट्रीज बहुत ही कम उम्र में ज्वाइन किया. पिता की देखरेख में जामनगर रिफाइनरी के डोमेस्टिक बिजनेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक रिलेशंस को समझने की जिम्मेदारी दी गई.
कह सकते हैं कि धीरूभाई के जमाने से चले आ रहे पारिवारिक संबंधों और मुकेश अंबानी के तीनों बच्चों आकाश, ईशा और अनंत के साथ बचपन की दोस्ती के कारण धनराज ने बहुत तेजी से कंपनी के भीतर अपना भरोसा कायम किया. अंबानी परिवार में उनकी एंट्री और भरोसा इस कदर है कि 2024 में जब मुकेश अंबानी के घर आकाश और श्लोका की बेटी का जन्म हुआ, तो दुनिया को इसकी खबर धनराज नाथवानी के सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मिली.
धनराज को रिलायंस में मिली बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां
किस्मत, मेहनत और रसूख से धनराज आज रिलायंस ग्रुप में ग्रुप प्रेसिडेंट के सबसे पावरफुल पोस्ट संभाल रहे हैं. उन्हें रिलायंस एम्पायर का 'राइजिंग स्टार' माना जाता है. न केवल जामनगर और वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स को हेड कर रहे हैं, बल्कि फ्यूचर प्रोजेक्ट रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में डायरेक्टर के रूप में मुकेश अंबानी के ग्रीन एनर्जी विजन को जमीन पर उतारने का सबसे मुख्य जिम्मा भी संभाल रहे हैं. रिलायंस जियो (Jio) के पूरे देश में नेटवर्क विस्तार के पीछे भी उनकी बैकएंड मैनेजमेंट टीम का बड़ा दिमाग माना जाता है.
धनराज और भूमि की लव-स्टोरी और शादी
धनराज नाथवानी की शादी 2014 में भूमि खंडवाला के साथ हुई. भूमि खंडवाला 'केआईएफएस (KIFS) फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड' के चेयरमैन मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश खंडवाला की बेटी हैं. धनराज नाथवानी और भूमि खंडवाला की पहली मुलाकात और प्यार की कहानी भी किसी मॉडर्न और हाई-प्रोफाइल बिजनेस फैमिली की तरह बेहद दिलचस्प है. गुजरात के दो बड़े रसूखदार परिवारों नाथवानी और खंडवाला एक दूसरे के लिए अनजान नहीं रहे.
चूंकि धनराज नाथवानी और भूमि खंडवाला दोनों एक ही सोशल और फ्रेंड सर्कल का हिस्सा थे. मिलते-मिलाते दोनों के बीच ट्यूनिंग सेट होती गई. एक-दूसरे को समझने और पसंद करने के बाद परिवारों की मर्जी से 2014 में शादी हो गई. भूमि के पिता राजेश खंडवाला की कंपनी 'केआईएफएस फाइनेंशियल' और धनराज के पिता परिमल नाथवानी के रिलायंस एम्पायर के रिश्ते पहले से काफी मजबूत थे.
परिमल नाथवनी और कांग्रेस का अजब संयोग!
परिमल या धनराज देश के बिजनेसमैन नहीं, उद्योगपति नहीं लेकिन किसी से कम भी नहीं. परिमल नाथवानी ने चुनावी हलफनामे में 755 करोड़ की अकूत संपत्ति का खुलासा किया था. राजनीति में क्रॉस-वोटिंग के किंग और सर्वदलीय मित्र माने जाते हैं परिमल नाथवानी. जिनके पास राजनीति में टिके रहने का जादुई फॉर्मूला है. परिमल नाथवानी 2008 में राजनीति में आए. कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़े. कभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए लेकिन तब से चौथी बार निर्दलीय राज्यसभा सांसद बने हैं. वैसे कहने के लिए निर्दलीय हैं लेकिन माने जाते हैं एकदम पक्के वाले बीजेपी के.
परिमल नाथवानी का कांग्रेस के साथ अजब संयोग है, वो बिना बहुमत चुनाव लड़ने किसी भी राज्य में पहुंच जाते हैं. उनके आते ही सबसे पहले कोई पार्टी टूटती है तो वो है कांग्रेस. 2008 में पहली निर्दलीय लड़ने पर परिमल नाथवानी को जिताने के लिए कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी के विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर नाथवानी के लिए क्रॉस वोटिंग की. 2014 में भी झारखंड से जीते जहां कांग्रेस और जेएमएम के विधायकों की क्रॉस-वोटिंग और अंदरूनी बगावत का इतिहास रहा है. 2014 में अचानक आंध्र प्रदेश चले गए जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने. इस साल जून में फिर झारखंड लौटे और एनडीए की मदद से संसद पहुंच गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उनकी दोस्ती तब से है जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे.
खेल की दुनिया के बड़े किंगमेकर है धनराज!
धनराज सिर्फ बंद कमरों में बिजनेस डील नहीं करते, बल्कि खेल की दुनिया के भी बड़े किंगमेकर हैं. गृह मंत्री अमित शाह के बाद धनराज नाथवानी को ही गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) का अध्यक्ष चुना गया. दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम, यानी अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण, उसकी भव्यता और उसके हाई-टेक मैनेजमेंट को संभालने में धनराज ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. इसके अलावा वे गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन और जामनगर फुटबॉल एसोसिएशन के भी प्रेसिडेंट हैं. कॉर्पोरेट से लेकर देश के सबसे बड़े खेल संघों को चलाने का अनुभव उन्हें बेहद यूनीक बनाता है.
इस सवाल का साफ जवाब नहीं कि परिमल नाथवानी के बीजेपी और एनडीए के इतने करीबी होने के बावजूद धनराज को अखिलेश यादव ने राज्यसभा का टिकट क्यों दिया? पुरानी राजनीति के जानकारों के लिए इतने शायज अचंभा न हो. मुलायम सिंह यादव के जमाने से ही अंबानी परिवार और रिलायंस ग्रुप के समाजवादी पार्टी से अच्छे रिश्ते रहे हैं. अमर सिंह कड़ी का काम करते रहे. आज मुलायम सिंह और अमर सिंह दोनों ही नहीं है लेकिन परिमल नाथवानी के बेटे धनराज को पार्टी का सांसद बनाकर अखिलेश यादव ने ये मैसेज तो दे दिया कि वो मुकेश अंबानी के बेटे की शादी में केवल भोज खाने तो नहीं गए थे.
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