Yogi Adityanath On Ravi Kishan PhD: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान सांसद रवि किशन की मानद पीएचडी डिग्री पर चुटकी का वीडियो वायरल हो रहा है. दरअसल, सीएम योगी गोरखपुर के रामगढ़ताल की बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में शिक्षामित्र सम्मान समारोह का आयोजन के मौके पर बोल रहे थे. इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से सांसद रवि किशन की मानद पीएचडी डिग्री को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की. सीएम ने मजाकिया लहजे में कहा कि रवि किशन इस डिग्री को केवल टांग सकते हैं, इसके नाम पर उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी और न ही वे प्रोफेसर लिख सकते हैं. क्या है ये पूरा वाक्या चलिए जानते हैं इस खबर में...
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डिग्री को लेकर सीएम ने रवि किशन से कही ये बात
सीएम योगी ने बताया कि जब वे कार्यक्रम में आ रहे थे तो तब मुझे हमारे सांसद रवि किशन मिले. उन्होंने कहा कि आपने मुझे बधाई नहीं दी. मैंने पूछा किस बात की बधाई तो उन्होंने बताया कि उन्हें पीएचडी की उपाधि मिली है. मैंने कहा कि वह मानद उपाधि है. इस पर उन्होंने कहा कि अब वे अपने नाम के आगे प्रोफेसर लिखेंगे. मैंने उन्हें समझाया कि मानद उपाधि के आधार पर प्रोफेसर नहीं लिखा जा सकता. ऐसी डिग्री से कोई नौकरी भी नहीं मिलती. यह सिर्फ सम्मान के रूप में होती है, जिसे आप अपने साथ रख सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर लिखेंगे तो मैंने मजाक में कहा कि अगर ऐसे डॉक्टर बनकर इलाज करने निकल गए तो क्या होगा? मैंने उदाहरण देते हुए कहा कि असली पीएचडी करने वाले लोग ही प्रोफेसर बनते हैं. रवि किशन को जो मानद उपाधि मिली है उसके लिए हम उन्हें बधाई जरूर देते हैं.
भोपाल की यूनिवर्सिटी ने दिया सम्मान
सांसद रवि किशन को यह मानद डॉक्टरेट की उपाधि 4 मई 2026 को भोपाल स्थित एलएनसीटी यूनिवर्सिटी द्वारा दी गई थी. यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. रवि किशन को यह उपाधि कला, संस्कृति और समाज सेवा में उनके विशेष योगदान के लिए दी गई है. मुख्यमंत्री के इस बयान को वहां मौजूद लोगों ने एक मजेदार किस्से के रूप में लिया.
जानें क्या होती है मानद उपाधि?
मानद पीएचडी कोई शैक्षणिक या रिसर्च वाली डिग्री नहीं होती है, यह एक सम्मान है. इसे किसी व्यक्ति की समाज में उपलब्धियों को सराहने के लिए दिया जाता है. नियम के अनुसार, ऐसी डिग्री पाने वाले व्यक्ति इसका इस्तेमाल पेशेवर या आधिकारिक दस्तावेजों में शैक्षणिक डॉक्टर के तौर पर नहीं कर सकते. सीएम योगी ने भी इसी बात की ओर इशारा किया कि इसका उपयोग सीमित होता है और इसे केवल सम्मान के तौर पर देखा जाना चाहिए.
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