स्मार्ट मीटर पर महिलाओं के बवाल के बाद CM योगी का बड़ा एक्शन: प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता पर रोक, उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश में भारी विरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता पर रोक लगा दी है. अब तकनीकी समिति की जांच पूरी होने तक नए मीटर नहीं लगेंगे और जीरो बैलेंस होने पर भी 45 दिनों तक बिजली नहीं काटी जाएगी.

cm yogi adityanath
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गौरव कुमार पांडेय

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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर चल रहे भारी विरोध प्रदर्शन और उपभोक्ताओं की नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है. सीएम योगी ने तत्काल प्रभाव से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता पर रोक लगा दी है. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आ रही शिकायतों और विशेषकर महिलाओं द्वारा किए जा रहे उग्र प्रदर्शनों का संज्ञान लेते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है.

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विशेषज्ञ समिति का गठन और नई गाइडलाइंस

योगी सरकार ने स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था से जुड़ी खामियों और ओवर बिलिंग की शिकायतों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) का गठन किया है. जब तक यह चार सदस्यीय तकनीकी समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट नहीं सौंप देती, तब तक प्रदेश में नए स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे.

उपभोक्ताओं को मिलेगी ये 5 बड़ी राहत:

अनिवार्यता पर रोक: अब उपभोक्ताओं पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के लिए दबाव नहीं बनाया जाएगा.

जीरो बैलेंस पर नहीं कटेगी बिजली: यदि स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता का बैलेंस खत्म (Zero Balance) हो जाता है, तो भी कनेक्शन तुरंत नहीं काटा जाएगा. उपभोक्ताओं को 45 दिनों तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति मिलती रहेगी ताकि वे भुगतान कर सकें.

SMS अलर्ट सिस्टम: बिल और बैलेंस संबंधी जानकारी देने के लिए पांच स्तरीय (5-Level) एसएमएस अलर्ट सिस्टम लागू किया जाएगा.

छुट्टी या रात में नो कट: ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रविवार, सार्वजनिक अवकाश या रात के समय किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन नहीं काटा जाएगा.

मानवीय दृष्टिकोण: भीषण गर्मी को देखते हुए यूपीपीसीएल (UPPCL) को संवेदनशीलता बरतने और बिना रुकावट बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

क्यों हो रहा था स्मार्ट मीटर का विरोध?

प्रदेश में अब तक लगभग 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 70 लाख प्रीपेड हैं. उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया था कि:

  • बिना पूर्व सूचना या सहमति के जबरन पुराने मीटर हटाकर प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं.
  • मीटर लगने के बाद बिजली का खर्च पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गया है.
  • रिचार्ज करने के बाद भी सप्लाई रिस्टोर होने में तकनीकी दिक्कतें (App Fault) आ रही हैं.
  • बैलेंस खत्म होते ही बिना किसी चेतावनी के बिजली काट दी जाती है.

मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद उन लाखों उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है जो पिछले कई दिनों से बिजली घरों का घेराव और प्रदर्शन कर रहे थे.

 

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