Deepika Nagar death case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव की दीपिका नागर की मौत के मामले ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. करीब 14 महीने पहले जिस बेटी की शादी एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का खर्च कर धूमधाम से की गई थी, उसका ऐसा दर्दनाक अंत होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था. इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब पहली बार एक चश्मदीद गवाह कैमरे के सामने आया है. पड़ोस में रहने वाले इस चश्मदीद के खुलासे ने पूरी कहानी को एक एकदम नया और अलग एंगल दे दिया है, जिसने पुलिस और जनता दोनों को हैरान कर दिया है.
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आधी रात को गूंजी तेज आवाज और नीचे पड़ी थी दीपिका
दीपिका नागर के ससुराल वाले घर के ठीक पड़ोस में रहने वाले गुलजार चौधरी पहली बार कैमरे पर सामने आए हैं. उन्होंने उस खौफनाक रात की पूरी कहानी बयां की. गुलजार चौधरी ने बताया कि यह घटना रात के करीब 12:30 बजे की है. वह अपने घर के अंदर थे, तभी अचानक बाहर से एक बहुत तेज आवाज सुनाई दी. आवाज सुनकर वह तुरंत दौड़कर बाहर की तरफ भागे. जब उन्होंने बाहर जाकर देखा, तो सामने वाले घर की बहू यानी ऋतिक की पत्नी दीपिका नागर जमीन पर लोहे के जाल के पास पड़ी हुई थीं.
चेहरा जमीन की तरफ था और ऊपर से चिल्लाता हुआ आया पति
चश्मदीद गुलजार चौधरी ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए बताया कि जब उन्होंने दीपिका को देखा, तो उनका चेहरा पूरी तरह से जमीन की तरफ था, यानी वह औंधे मुंह गिरी हुई थीं. गुलजार ने तुरंत आगे बढ़कर दीपिका को जमीन से उठाया. ठीक उसी समय दीपिका का पति ऋतिक भी ऊपर जीने से भागता हुआ नीचे आया और जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगा. ऋतिक ने बदहवास हालत में गुलजार से कहा कि भैया इन्हें जल्दी से उठाकर गाड़ी में रखवा दो. इसके बाद मनोज प्रधान की गाड़ी बुलाई गई और दीपिका को तुरंत अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई.
दो अस्पतालों के चक्कर काटे, ससुर ने मांगी थी चाबी
गुलजार चौधरी के मुताबिक, दीपिका को गाड़ी में लिटाने के बाद सबसे पहले पास के सैनी हॉस्पिटल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखकर हाथ खड़े कर दिए और एडमिट करने से मना कर दिया. इसके बाद उन्हें तुरंत ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल ले जाया गया. गुलजार ने बताया कि गाड़ी पहले ऋतिक चला रहा था, लेकिन बाद में मनोज गाड़ी चलाकर ले गया. घटना के तुरंत बाद दीपिका के ससुर भी बाहर आए थे और उन्होंने ही गाड़ी की चाबी मांगी थी. अस्पताल ले जाते समय दीपिका की सांसें चल रही थीं या नहीं, इस पर चश्मदीद ने कहा कि वह बदहवास माहौल में इस बात को ठीक से नोटिस नहीं कर पाए.
पहली बार टीवी पर देखा चेहरा, हमेशा घूंघट में रहती थी बहू
पड़ोसी गुलजार चौधरी ने बताया कि दीपिका नागर एक बहुत ही संस्कारी और सीधे स्वभाव की महिला थीं. वह कभी भी किसी पड़ोसी के घर फालतू आना-जाना नहीं रखती थीं. जब भी वह घर से बाहर निकलती थीं, तो हमेशा बड़े घूंघट में ही रहती थीं. गुलजार ने दावा किया कि उन्होंने इतने महीनों में कभी भी दीपिका का चेहरा नहीं देखा था और कल जब न्यूज़ चैनलों पर यह खबर चली, तब उन्होंने पहली बार दीपिका का चेहरा ठीक से देखा. उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मोहल्ले में कभी भी पति-पत्नी के बीच किसी तरह की लड़ाई-झगड़े या शोर-शराबे की आवाज नहीं सुनी गई. ऋतिक का व्यवहार भी सबके साथ बहुत अच्छा था.
पढ़ी-लिखी बहू के लिए गांव में स्कूल बनवा रहे थे ससुर
इस मामले में चश्मदीद ने एक और बड़ा दावा किया है जो प्रताड़ना के आरोपों के बीच एक अलग कहानी दिखाता है. गुलजार चौधरी ने बताया कि दीपिका काफी पढ़ी-लिखी थी और उसने बीएड (B.Ed) कर रखा था, जबकि उसका पति ऋतिक उतना पढ़ा-लिखा नहीं था. बहू के पढ़े-लिखे होने की वजह से उसके ससुर गांव में एक स्कूल का निर्माण करवा रहे थे. पहले वे स्कूल को किराए की बिल्डिंग में चलवाते थे, लेकिन बहू के आने के बाद उन्होंने पुरानी जगह हटवाकर वहां नए सिरे से कंस्ट्रक्शन शुरू करवाया था ताकि स्कूल की बड़ी मान्यता ली जा सके और बहू उसे अच्छे से संभाल सके.
बड़े धूमधाम की थी शादी
गुलजार ने बताया कि वह करीब डेढ़ साल पहले हुई ऋतिक और दीपिका की शादी में अपने पूरे परिवार और दोस्तों के साथ गए थे. लड़की वालों ने अपनी हैसियत से बढ़कर बहुत ही शानदार शादी की थी. हालांकि, दीपिका के मायके वालों (मूल निवासी कुड़ी गांव) का आरोप बिल्कुल अलग है. परिजनों का कहना है कि शादी में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने के बाद भी ससुराल वालों की लालच खत्म नहीं हुई. शुरुआती कुछ महीनों के बाद दीपिका को दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा, जिसके कारण परेशान होकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पति ऋतिक और ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की गहन जांच जारी है.
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