प्रोफेसर से मेयर, फिर डिप्टी CM और अब उपराज्यपाल...कौन हैं डॉ. दिनेश शर्मा, जिन्हें मिली बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी?

सुषमा पांडेय

• 11:56 AM • 06 Sep 2026

Dinesh Sharma News: उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक दिवस की देर शाम यह नियुक्ति की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं.

दिनेश शर्मा बने अंडमान निकोबार के नए उपराज्यपाल.
दिनेश शर्मा बने अंडमान निकोबार के नए उपराज्यपाल.
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Dinesh Sharma Lieutenant Governor Andaman Nicobar:उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक लंबा अनुभव रखने वाले और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के राजनीतिक सफर में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है. केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) नियुक्त किया है. वे एडमिरल डीके जोशी की जगह यह संवैधानिक जिम्मेदारी संभालेंगे. इस घोषणा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं ने उन्हें ढेरों बधाई और शुभकामनाएं दी हैं.

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शिक्षक दिवस पर हुई नियुक्ति, सीएम योगी ने दी बधाई

5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस की देर शाम राष्ट्रपति भवन से जारी अधिसूचना में डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान निकोबार का नया LG नियुक्त किए जाने का ऐलान हुआ. नियुक्ति की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों का तांता लग गया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बधाई देते हुए लिखा कि डॉ. दिनेश शर्मा जी को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई. आपके सफल एवं यशस्वी कार्यकाल हेतु अनंत मंगल कामनाएं. इसके अलावा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं ने भी उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं भेजीं.

केंद्रीय नेतृत्व और पीएम मोदी का जताया आभार

अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल का पद मिलने के बाद डॉ. दिनेश शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए केवल एक पद नहीं है, बल्कि संविधान, राष्ट्र और जनसेवा के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है. उन्होंने पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों के निर्वहन का संकल्प दोहराया और सभी शुभचिंतकों के स्नेह व आशीर्वाद के लिए धन्यवाद दिया.

कौन हैं डॉ. दिनेश शर्मा और कैसा रहा उनका सफर?

12 जनवरी 1964 को लखनऊ में जन्मे डॉ. दिनेश शर्मा की पहचान एक सौम्य और अध्ययनशील राजनेता के रूप में रही है. राजनीति में कदम रखने से पहले वे लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य (कॉमर्स) विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे. उनकी राजनीतिक यात्रा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुई, जिसके बाद उन्होंने बीजेपी संगठन में अपनी गहरी पैठ बनाई.

लखनऊ के दो बार मेयर: साल 2008 में वे पहली बार लखनऊ के मेयर चुने गए और साल 2012 में दोबारा भारी मतों से इस पद पर विजयी हुए.
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात प्रभारी: साल 2014 में उनके कुशल संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया और उन्हें गुजरात का प्रभारी भी सौंपा गया. इस दौरान वे केंद्रीय नेतृत्व और मोदी-शाह की कोर टीम के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाने लगे.

यूपी के डिप्टी सीएम से राज्यसभा सांसद तक की कमान

साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो उनके साथ डॉ. दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया. उन्होंने 2017 से 2022 तक डिप्टी सीएम के रूप में माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभाला. इसके बाद साल 2023 में बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सांसद बनाकर संसद भेजा, जहां वे विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर रहे.

सुर्खियों और विवादों से भी रहा नाता

अपने राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान डॉ. दिनेश शर्मा अपने कुछ बयानों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियों में रहे. साल 2018 में मथुरा के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रामायण काल में टेस्ट ट्यूब बेबी जैसी तकनीक होने की बात कही थी और माता सीता के जन्म को इसी संदर्भ में जोड़ा था, जिस पर काफी बहस हुई थी. इसके अलावा 2021-22 में समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे के जवाब में उन्होंने इसका अर्थ "पीड़ित करना, दगाबाजी और अपराधियों को संरक्षण देना" बताकर सियासी भूचाल ला दिया था.

अब लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में शुरू हुआ उनका सार्वजनिक जीवन लखनऊ के मेयर, बीजेपी संगठन, यूपी के डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद के पड़ावों से गुजरते हुए अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल के संवैधानिक पद तक पहुंच गया है.

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