उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं, निजी रुचियों और परिवार को ध्यान में रखते हुए वॉलंटरी रेजिग्नेशन (इस्तीफा) दिया है. उनके इस फैसले के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि उन्होंने किसी भी राजनीतिक दबाव या सरकार से मतभेद की बात से इनकार किया है, लेकिन इस बीच उनके राजनीति में आने और कांग्रेस के साथ जुड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं.
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कांग्रेस की ओर से मिला चुनाव लड़ने का संकेत!
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को एक पत्र भेजा है. उन्होंने अधिकारियों के सम्मान और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा की मांग उठाई है. अजय राय ने दिव्या मित्तल को एक बेहद ईमानदार अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि 2017 में बीजेपी सरकार बनने के बाद से अब तक यूपी में 13 आईएएस और 7 आईपीएस अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं या वीआरएस ले चुके हैं, जो कि प्रदेश का दुर्भाग्य है.
वहीं जब अजय राय से पूछा गया कि क्या दिव्या मित्तल के चुनाव लड़ने पर कांग्रेस उन्हें टिकट देगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई समाज में काम करना चाहता है और चुनाव लड़ना चाहेगा, तो कांग्रेस पार्टी निश्चित तौर पर उस पर विचार करेगी. राहुल गांधी से मुलाकात की खबरों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी तो नहीं है, लेकिन देश के अच्छे काम करने वाले अधिकारी राहुल गांधी से जुड़ रहे हैं.
लंदन की नौकरी छोड़ बनीं थी आईएएस
23 नवंबर 1983 को नई दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मीं दिव्या मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी जिले की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली में हुई. आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने के बाद उन्होंने आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई पूरी की और अपने बैच के टॉप 5% छात्रों में जगह बनाई. इसके बाद उन्होंने लंदन में एक अच्छी नौकरी की. हालांकि देश सेवा की भावना के कारण वह भारत लौट आईं और यूपीएससी की तैयारी शुरू की. पहले प्रयास में उन्हें आईपीएस सेवा मिली थी, लेकिन दोबारा प्रयास करने पर 2013 में ऑल इंडिया 68वीं रैंक के साथ वह आईएएस बनीं. उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लू भी यूपी कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं.
करियर में विवाद और चर्चों से भी रहा नाता
दिव्या मित्तल का प्रशासनिक करियर काफी चर्चा में रहा. मिर्जापुर की डीएम रहते हुए उन्होंने पहाड़ी पर स्थित 'लहुरिया दह' गांव में आजादी के 77 साल बाद पहली बार नल का पानी पहुंचाया था. हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पानी की पाइपलाइन के उद्घाटन को लेकर जनप्रतिनिधि (स्थानीय विधायक) से प्रोटोकॉल विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद उनका ट्रांसफर बस्ती कर दिया गया था.
इसके अलावा देवरिया की डीएम रहने के दौरान एक बैठक में नेताओं और मंत्रियों की मौजूदगी के बीच अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर उनका सख्त रुख सामने आया था, जहां उन्होंने नेताओं को दो टूक कहा था कि कोई भी नियम के खिलाफ जाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग की जिद नहीं कर सकता. उनके इस निर्भीक अंदाज की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हुई थी.
राजस्व विभाग में विशेष सचिव थी आखिरी पोस्टिंग
दिव्या मित्तल ने मेरठ में जॉइंट मजिस्ट्रेट, गोंडा में सीडीओ, कानपुर नगर में यूपीएसआईडीसी की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, बरेली डेवलपमेंट अथॉरिटी की उपाध्यक्ष के अलावा संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में बतौर जिलाधिकारी सेवाएं दीं. इस्तीफा देने से पहले वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं, जो उनके आईएएस करियर की आखिरी पोस्टिंग साबित हुई. अब देखना यह होगा कि इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल क्या रुख अपनाती हैं और क्या वह वाकई प्रत्यक्ष तौर पर राजनीति के मैदान में उतरती हैं या नहीं.
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