कूल्हा टूटने के कारण चल नहीं पा रही थीं दादी…पेंशन के लिए ठेले पर बैंक पहुंची, Video वायरल होते ही हरकत में आया बैंक प्रशासन

फर्रुखाबाद में 73 साल के किशन प्यारी टूटा हुआ कूल्हा होने के बावजूद रेहड़ी पर बैठकर पेंशन निकालने बैंक पहुंचीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

कूल्हा टूटने पर बैंक पहुंची दादी
कूल्हा टूटने पर बैंक पहुंची दादी

फिरोज खान

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उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया. सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पेंशन निकालने के लिए रेहड़ी पर बैठकर बैंक जाती नजर आ रही हैं. तपती धूप से बचने के लिए उनके हाथ में छाता भी दिखाई दे रहा है. वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.

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बताया जा रहा है कि यह वीडियो बीते शुक्रवार का है. वीडियो में दिखाई दे रही महिला फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ क्षेत्र के हाथी खान मोहल्ले की रहने वाली किशन प्यारी हैं, जिनकी उम्र करीब 73 साल है. उनके पति विद्युत विभाग में नौकरी करते थे और रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन मिलने लगी थी. पति के निधन के बाद अब यह पेंशन किशन प्यारी को मिलती है. 

कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण नहीं जा पा रही थी बैंक

परिवार के अनुसार इन दिनों किशन प्यारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं. उनका कूल्हा टूट गया है, जिसके कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं. ऐसे में बैंक जाकर पेंशन निकालना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था. इसके बावजूद पेंशन की जरूरत के चलते उन्हें रेहड़ी पर बैठाकर बैंक ले जाया गया.

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों ने बुजुर्ग महिला की परेशानी पर चिंता जताई और बैंक कर्मचारियों की संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े किए. मामला चर्चा में आने के बाद बैंक प्रशासन भी हरकत में आ गया.

बैंक ने मानी गलती

बैंक ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी गलती स्वीकार की. बैंक मैनेजर प्रवेश वर्मा खुद बुजुर्ग महिला के घर पहुंचे और उन्हें पेंशन उपलब्ध कराई. इसके साथ ही बैंक की ओर से इस संबंध में वीडियो भी जारी किया गया है.

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बुजुर्ग और असहाय लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं को और अधिक संवेदनशील और सुविधाजनक बनाने की जरूरत है, ताकि किसी भी वरिष्ठ नागरिक को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

 

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