फर्रुखाबाद सदर चुनाव 2027: BJP के पारंपरिक किले में क्या सेंध लगा पाएगी सपा? जानिए सियासी समीकरण

सुषमा पांडेय

• 09:57 AM • 04 Aug 2026

फर्रुखाबाद सदर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत किला मानी जाती है, जहां 2027 के चुनाव में पार्टी हैट्रिक लगाने की तैयारी में है. हालांकि, बेरोजगारी, महंगाई और विकास के स्थानीय मुद्दों को ढाल बनाकर समाजवादी पार्टी इस पारंपरिक सीट पर कड़े मुकाबले की चुनौती पेश कर रही है.

अखिलेश यादव
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सुगबुगाहट तेज होते ही प्रदेश की वीआईपी सीटों पर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. इन्हीं में से एक बेहद अहम और दिलचस्प सीट है फर्रुखाबाद सदर (विधानसभा संख्या 157). यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है. हालांकि, समाजवादी पार्टी (SP) इस बार बीजेपी के इस किले में सेंध लगाने की पूरी कोशिश में है.

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क्या बीजेपी अपने संगठन और साख के दम पर यहां फिर से बाजी मारेगी या फिर सपा कोई नया उलटफेर करेगी? आइए समझते हैं फर्रुखाबाद सदर का इतिहास, जातीय समीकरण और चुनावी दांव-पेच.

सियासी इतिहास: स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी का दौर और बड़ा उलटफेर

फर्रुखाबाद सदर की राजनीति में शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन बाद में जनसंघ और बीजेपी ने यहां मजबूत जमीन तैयार की. इस सीट पर लंबे समय तक बीजेपी के कद्दावर नेता स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी का प्रभाव रहा.

1997 का मोड़: फरवरी 1997 में ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के बाद यहां के समीकरण पूरी तरह बदल गए. इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी प्रभा द्विवेदी ने जीत दर्ज की और सरकार में मंत्री बनीं.

2002 से 2012 तक निर्दलीय व सपा का कब्जा: 2002 में ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड के आरोपी विजय सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर बड़ा उलटफेर कर दिया. बाद में वे सपा में शामिल हुए और 2007 व 2012 के चुनाव में भी बीजेपी के सुनील दत्त द्विवेदी को हराया.

2017 व 2022 में बीजेपी की वापसी: 2017 की बीजेपी लहर में स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे सुनील दत्त द्विवेदी (मेजर साहब) ने शानदार वापसी की. उन्होंने 2022 के चुनाव में भी जीत हासिल कर अपनी सीट बरकरार रखी. अब बीजेपी यहां से जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है.

बीजेपी और सपा के अपने-अपने दावे

बीजेपी की तैयारी: बीजेपी पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी का संगठन 24 घंटे और 365 दिन चुनावी मोड में रहता है. फर्रुखाबाद में सुरक्षा और डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों के नाम पर वोट मांगा जाएगा. पार्टी का दावा है कि उनके 268 शक्ति केंद्रों और 1612 बूथों पर मजबूत प्रबंधन है.

सपा का पलटवार: वहीं, समाजवादी पार्टी का आरोप है कि बीजेपी केवल वादे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है. सपा नेताओं का कहना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को पड़ोसी जिलों में शिफ्ट कर दिया गया और स्थानीय जनप्रतिनिधि फर्रुखाबाद के हक के लिए आवाज नहीं उठा पाए. सपा का दावा है कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है.

फर्रुखाबाद सदर सीट का जातीय समीकरण (वोटर आंकड़ा)

फर्रुखाबाद सदर में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3,54,286 है. यहां किसी एक जाति का पूर्ण वर्चस्व नहीं है, लेकिन ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता सबसे निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं.

फर्रुखाबाद सदर सीट का जातीय समीकरण (वोटर आंकड़ा)

फर्रुखाबाद सदर विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3,54,286 है, जहाँ किसी एक जाति का पूर्ण वर्चस्व न होकर समीकरण काफी दिलचस्प और संतुलित नजर आता है; यहाँ सबसे निर्णायक भूमिका में लगभग 70,000 मुस्लिम और 55,000 ब्राह्मण मतदाता माने जाते हैं, जिनके साथ ही करीब 50,000 अनुसूचित जाति (SC), 38,000 लोधी, 35,000 शाक्य, 25,000 वैश्य, 24,000 यादव, 20,000 कुर्मी, 20,000 बाथम (निषाद/कश्यप) और लगभग 18,000 क्षत्रिय मतदाता भी चुनाव की दिशा और चुनावी नतीजे तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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