उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. यूपी की कई ऐसी सीटें हैं जहां इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है. इन्हीं में से एक है फतेहपुर सदर विधानसभा सीट, जिसे कभी भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता था. साल 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यहां ऐसा चक्रव्यूह रचा कि बीजेपी को ज्यादा वोट मिलने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा. अब सवाल यह है कि क्या 2027 में सपा अपनी जीत को बरकरार रख पाएगी या बीजेपी यहां फिर से कमल खिलाने में कामयाब होगी.
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साल 2014 के बाद से फतेहपुर सदर सीट पर बीजेपी लगातार मजबूत स्थिति में थी और 2017 के चुनाव में यहां से बीजेपी के विक्रम सिंह ने जीत दर्ज की थी. लेकिन 2022 के चुनाव में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक बड़ा दांव खेलते हुए लोधी समुदाय से आने वाले चंद्र प्रकाश लोधी को मैदान में उतार दिया. सपा के इस 'लोधी कार्ड' और 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के सामने बीजेपी की रणनीति फेल हो गई और बेहद करीबी मुकाबले में चंद्र प्रकाश लोधी चुनाव जीत गए.
यूपी तक की ग्राउंड रिपोर्ट में मौजूदा सपा विधायक और बीजेपी के पूर्व विधायक ने अपनी-अपनी तैयारियों और दावों को सामने रखा है. सपा विधायक चंद्र प्रकाश लोधी का दावा है कि वे 2022 में जीतने के बाद से लगातार जनता के बीच बने हुए हैं. उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लगभग 200 से 250 सीसी रोड बनवाने और कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने की बात कही है. साथ ही उन्होंने बताया कि उनके और सांसद के प्रयासों से क्षेत्र में सीवर लाइन का काम भी शुरू हो गया है. दूसरी तरफ, बीजेपी के पूर्व विधायक विक्रम सिंह अपनी पिछली गलतियों से सीखकर मैदान में उतरने की बात कह रहे हैं. उनका आरोप है कि उनके न रहने से फतेहपुर के विकास कार्य रुके हैं और वे इस बार उन गांवों तक पहुंचेंगे जो पिछले 5 सालों में विकास से वंचित रह गए.
मौजूदा विधायक और पूर्व विधायक के अपने-अपने दावे
फतेहपुर सदर सीट पर किसी भी दल की जीत का रास्ता यहां के जातीय समीकरणों से होकर ही गुजरता है. इस विधानसभा में एक अनुमान के मुताबिक लोधी समुदाय के मतदाता सबसे ज्यादा लगभग 34 हजार हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 32 हजार है. इसके बाद वैश्य 20 हजार, कायस्थ 17 हजार, ब्राह्मण 17 हजार, जाटव 17 हजार, क्षत्रिय 16 हजार, कुशवाहा 16 हजार, पाल 16 हजार, पासी 14 हजार और यादव मतदाता लगभग 13 हजार हैं. इस समीकरण से साफ है कि लोधी और मुस्लिम मतदाता यहां सबसे बड़ी निर्णायक भूमिका में हैं और 2022 में सपा ने इसी समीकरण को साधकर बाजी मारी थी.
स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का मुकाबला पूरी तरह कांटे की टक्कर का होने वाला है. विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा सपा विधायक को लेकर जनता के बीच थोड़ी एंटी-इन्कंबेंसी भी देखने को मिल रही है, क्योंकि कुछ लोगों का मानना है कि विधायक को स्थानीय मुद्दों को लेकर और ज्यादा मुखर होना चाहिए था. पत्रकारों का कहना है कि 2027 का नतीजा बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि बीजेपी किस उम्मीदवार को टिकट देती है. अगर बीजेपी ने प्रत्याशी चयन में पारदर्शिता दिखाई और कोई मजबूत चेहरा उतारा, तो बीजेपी का पलड़ा भारी हो सकता है, जबकि सपा को भी अपनी मौजूदा पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर और मेहनत करनी होगी. कुल मिलाकर फतेहपुर सदर की जंग 2027 में बेहद दिलचस्प होने वाली है.
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