कौन हैं धर्मेंद्र कश्यप जो अखिलेश यादव के साथ मिलकर बिगाड़ सकते हैं BJP का बड़ा गणित

सुषमा पांडेय

• 10:39 AM • 08 Oct 2026

आंवला के पूर्व बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा का टिकट न मिलने और 2024 में विरोध करने वाले नेताओं की उपेक्षा से आहत होकर पार्टी से दूरी बनाते हुए 'टाटा बाय-बाय' के संकेत दिए हैं.

धर्मेंद्र कश्यप
धर्मेंद्र कश्यप
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उत्तर प्रदेश में 2026 के राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की लिस्ट आते ही रूठने-मनाने का दौर शुरू हो गया है। सबसे बड़ा झटका बरेली के आंवला क्षेत्र से दो बार सांसद रहे वरिष्ठ ओबीसी नेता धर्मेंद्र कश्यप ने दिया है. अपने आवास से बीजेपी का झंडा हटाने और सोशल मीडिया पर 'टाटा बाय-बाय' लिखने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

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कौन हैं धर्मेंद्र कश्यप?

धर्मेंद्र कश्यप उत्तर प्रदेश की राजनीति में रोहिलखंड क्षेत्र के प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक हैं. वे 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में आंवला सीट से बीजेपी के टिकट पर लगातार दो बार सांसद चुने गए थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था. 

कश्यप/निषाद बिरादरी में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है, जो बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और पीलीभीत की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है.

अखिलेश और साइकिल की सवारी से बीजेपी को कितना नुकसान?

'UP Tak' को दिए इंटरव्यू में कश्यप ने न केवल बीजेपी नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए, बल्कि अखिलेश यादव के साथ अपनी गहरी दोस्ती की बात भी खुलकर कबूल की. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी लगातार 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने में जुटी है. ऐसे में यदि धर्मेंद्र कश्यप सपा का दामन थामते हैं, तो अखिलेश यादव को रोहिलखंड में एक मजबूत गैर-यादव ओबीसी चेहरा मिल जाएगा. इससे इस क्षेत्र में बीजेपी के कैडर और वोटबैंक के गणित पर सीधा असर पड़ सकता है.

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