गाजीपुर में सपा डेलिगेशन पर पथराव, कौन है आशुतोष सिंह आशु? जिसने दी थी 'तालिबानी फरमान' वाली चेतावनी

Ghazipur Stone Pelting News: गाजीपुर में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सपा प्रतिनिधिमंडल पर पथराव हुआ, जिसका आरोप भाजपा से जुड़े प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष सिंह पर लगा है.

गाजीपुर
गाजीपुर

रजत सिंह

follow google news

Ghazipur News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रतिनिधिमंडल पर ग्रामीणों और प्रधान प्रतिनिधि के समर्थकों द्वारा पथराव किया गया. इस घटना में पूर्व मंत्री राम आश्रय विश्वकर्मा समेत कई सपा नेता और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष सिंह 'आशु', जिनकी चेतावनी को नजरअंदाज करना सपा नेताओं को भारी पड़ गया.

Read more!

क्या था पूरा मामला?

घटना गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव की है. यहां निशा विश्वकर्मा नाम की एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. परिवार ने हत्या का आरोप लगाया और एक समुदाय विशेष के व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया था, लेकिन सपा ने पीड़ित परिवार से मिलने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया.

आशुतोष सिंह आशु की चेतावनी और पथराव

गांव की वर्तमान प्रधान रीना सिंह के पुत्र और प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष सिंह आशु ने पहले ही प्रशासन को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि गांव में बाहरी डेलिगेशन को न आने दिया जाए, अन्यथा माहौल खराब हो सकता है. अखिलेश यादव ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'तालिबानी फरमान' करार दिया था.

जब राम आश्रय विश्वकर्मा के नेतृत्व में सपा नेता गांव पहुंचे, तो आशुतोष सिंह और उनके समर्थकों के साथ तीखी बहस हुई. देखते ही देखते मामला मारपीट और भारी पथराव में बदल गया. अखिलेश यादव ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि 'सत्ता पोषित वर्चस्ववादियों' ने पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं पर प्राणघातक हमला किया है.

कौन हैं आशुतोष सिंह 'आशु'?

आशुतोष सिंह आशु की पहचान इलाके में एक युवा भाजपा नेता के रूप में है. वे खुद को भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ बताते हैं. उनके पिता दिवंगत विनोद सिंह शिक्षक संघ की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे थे. वर्तमान में उनकी माता रीना सिंह ग्राम प्रधान हैं, जिनकी जगह आशुतोष ही सारा कार्यभार संभालते हैं.

मां पर टिप्पणी को लेकर अखिलेश यादव का भावुक जवाब

दिन की दूसरी बड़ी खबर लखनऊ की मेयर सुषमा खरकवाल और अखिलेश यादव के बीच छिड़ी 'जुबानी जंग' की है. महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को तत्काल लागू न कर पाने को लेकर भाजपा ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

अखिलेश यादव का सुषमा खरकवाल को पत्र

सोशल मीडिया पर लखनऊ की मेयर सुषमा खरकवाल का एक बयान चर्चा में आया, जिसमें कथित तौर पर अखिलेश यादव की दिवंगत माता का जिक्र करते हुए उन पर निशाना साधा गया था. इस पर अखिलेश यादव ने बेहद भावुक पोस्ट साझा की. उन्होंने लिखा, "आदरणीय सुषमा खरकवाल जी, कृपया अपनी राजनीतिक मजबूरी में मेरी दिवंगत मां का नाम लेकर एक महिला के रूप में दूसरी महिला का अपमान न करें." उन्होंने आगे कहा कि किसी भी मां का अपमान भारतीय समाज में स्वीकार्य नहीं है और वे मेयर से किसी माफी की अपेक्षा नहीं रखते.

मेयर की सफाई, मैं भारत माता की बात कर रही थी

विवाद बढ़ता देख मेयर सुषमा खरकवाल ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. वे 'मां' शब्द का उपयोग भारत माता, गंगा मां और धरती मां के संदर्भ में कर रही थीं. उन्होंने कहा कि जिस नारी शक्ति ने हमें जन्म दिया और पाल-पोसकर बड़ा किया, विपक्ष उसका विरोध कर रहा है, और इसी संदर्भ में उन्होंने 'मां' शब्द का उपयोग किया था.

 

    follow google news