उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां बेलीपार ब्लॉक के मलाव गांव में एक ही परिवार के 9 लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए. बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्यों ने पहले तरबूज खाया और उसके कुछ देर बाद मैगी का सेवन किया, जिसके बाद एक-एक कर सबकी तबीयत बिगड़ने लगी. बीमार पड़ने वालों में 8 साल की बच्ची से लेकर 70-80 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं.
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उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत
जानकारी के मुताबिक, यह घटना बुधवार (13 मई) की रात की है. तरबूज और मैगी खाने के कुछ घंटों बाद परिवार के लोगों को अचानक तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार के साथ तेज ठंड लगने की शिकायत होने लगी. तबीयत बिगड़ने पर आनन-फानन में सभी को पहले बेलीपार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. वहां स्थिति में सुधार न होने पर गुरुवार (14 मई) की शाम को सभी मरीजों को गोरखपुर के जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया.
डॉक्टरों ने क्या कहा?
गोरखपुर जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.के. सुमन ने बताया कि अस्पताल में एक ही परिवार के 9 लोग आए थे. प्राथमिक उपचार के बाद एक बच्ची की हालत पूरी तरह ठीक होने पर उसे घर भेज दिया गया है, जबकि बाकी 8 लोगों का इलाज अस्पताल में चल रहा है. फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति स्थिर बनी हुई है, हालांकि परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य (लगभग 78-80 वर्ष) की हालत पर विशेष नजर रखी जा रही है.
तरबूज या मैगी, बीमारी की वजह क्या?
डॉक्टरों के मुताबिक, फूड पॉइजनिंग की वजह तरबूज और मैगी दोनों में से कुछ भी हो सकती है. संभावना जताई जा रही है कि यदि मैगी की एक्सपायरी डेट नजदीक हो या वह ठीक से न पकी हो, तो भी इंफेक्शन हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ, आजकल तरबूज को जल्दी पकाने के लिए ऑक्सीटोसिन या अन्य रसायनों और मिलावट का सहारा लिया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. हालांकि, सटीक वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी.
डॉक्टरों की जनता से अपील
बदलते मौसम और संक्रमण के इस दौर में डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे बाजार से कोई भी चीज खरीदते समय पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें. साथ ही, हमेशा पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से पके हुए फलों का ही सेवन करें और घर में साफ-सफाई से बना ताजा भोजन ही खाएं.
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