Breaking: इच्छामृत्यु पा चुके हरीश राणा का AIIMS में निधन, पिछले 10 दिनों से चल रहा था पैसिव यूथनेशिया की चल रही थी प्रक्रिया

13 साल से कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हरीश राणा ने आखिरकार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के बाद AIIMS में दम तोड़ दिया. सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया ने पूरे देश को झकझोर दिया था.

Harish Rana Case
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शम्स ताहिर खान

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Harish Rana Death News: अंतिम यात्रा पर जाने के लिए पिछले 10  दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती हरीश राणा अब नहीं रहे. वे अब अनंत यात्रा पर निकल चुके हैं. जिस दिन हरीश को भर्ती किया गया उसी दिन उनका पोषण यानी राइस पाइप से दिया जाने वाला तरल पदार्थ बंद कर दिया गया. दो दिन बाद पानी भी बंद कर दिया गया था.

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हरीश के सारे जीवन रक्षक उपकरण हटा लिए गए थे. आज एम्स के डॉक्टरों Aaj Tak को बताया था कि हरीश की हालत स्थिर है. इसी बीच खबर आ रही है कि हरीश का निधन हो चुका है. हरीश राणा, भारत के पहले व्यक्ति हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति मिली थी. 31 वर्षीय हरीश जो 2013 से कोमा में थे उनको 14 मार्च को उनके गाजियाबाद स्थित घर से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉ. बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल की पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ़्ट किया गया था. 

कौन थे हरीश राणा?

हरीश पंजाब यूनिवर्सिटी में BTech के छात्र थे और 2013 में चौथी मंज़िल की बालकनी से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं. तब से वे कोमा में थे और उन्हें कृत्रिम पोषण (आर्टिफ़िशियल न्यूट्रिशन) तथा कभी-कभी ऑक्सीजन का सहारा दिया जा रहा था.

विशेष मेडिकल टीम का किया गया था गठन

PTI में प्रकाशित खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS-दिल्ली को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि लाइफ़ सपोर्ट को एक विशेष योजना के तहत हटाया जाए, ताकि मरीज़ की गरिमा बनी रहे. इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए  डॉ. सीमा मिश्रा (एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष) की अगुवाई में एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया था. इस टीम में न्यूरोसर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया, पैलिएटिव मेडिसिन और मनोरोग (साइकेट्री) विभागों के डॉक्टर शामिल थे.

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