Harish Rana death news: दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित मुक्ति धाम बुधवार सुबह एक ऐसी विदाई का गवाह बना, जिसने वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा चीर दिया. 13 साल तक बिस्तर पर बेजान पड़े रहे हरीश राणा का पार्थिव शरीर जब चिता पर रखा गया तो उनके छोटे भाई आशीष और छोटी बहन वंदना ने एक साथ हाथ से हाथ मिलाकर मुखाग्नि दी. यह सिर्फ एक अंतिम संस्कार नहीं था बल्कि एक परिवार के 13 साल लंबे संघर्ष और अंतहीन इंतजार का दुखद समापन था.
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हाथ में हाथ लेकर दी मुखाग्नि
हरीश राणा के अंतिम संस्कार में सबसे भावुक पल रहा जब बहन वंदना ने अपने बड़े भाई को अंतिम विदाई दी. भाई आशीष और बहन वंदना ने मिलकर अपने हरीश के शरीर को पंचतत्व के हवाले किया. इस दौरान हरीश के पार्थिव शरीर का पिंडदान और अंतिम पूजन किया गया तो धाम में मौजूद ब्रह्माकुमारी संस्थान के सदस्यों और रिश्तेदारों की आंखें छलक पड़ीं.
विदाई से पहले का वो आखिरी तिलक
सोशल मीडिया पर हरीश का एक आखिरी वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें एम्स ले जाने से पहले एक ब्रह्माकुमारी उन्हें तिलक लगाकर कह रही हैं, "सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाओ." गौरतलब है कि 24 मार्च की शाम 4:10 बजे हरीश ने अंतिम सांस ली.
क्या था मामला?
आपको बता दें कि हरीश राणा 2013 में पंजाब विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान चौथी मंजिल से गिर गए थे. सिर में गंभीर चोट के कारण वे कोमा में चले गए. सालों तक एम्स और गाजियाबाद के चक्कर काटने के बाद, उनकी मां ने बेटे को 'इच्छा मृत्यु' (Passive Euthanasia) दिलाने का कठिन फैसला किया. 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ऐतिहासिक मुहर लगाई, जिसके बाद एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे उनका लाइफ सपोर्ट हटाया गया.
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